घुट-घुट कर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं एनडीए के घटक दल

भाजपा गठबंधन में ये क्या हो रहा है. एक को मनाओ तो दूजा रूठ जाता है, की तर्ज पर रुसाफूली का खेल चल रहा है. मांझी को मनाने के बाद अब पासवान कुनबा नाराज है.chirag

नौकरशाही डेस्क

लेकिन एलजेपी अपनी ‘नाराजगी’ को  ‘हैरान’ जैसे शब्द का लिबास पहना रहा है.

रामविलास पासवान के बेटे चिराग ने प्रेस से कहा कि वह नाराज नहीं है. प्लीज नाराज जैसे शब्द न कहें इसे, हां हैरान जरूर हैं हम. हम जिस फार्मुले के तहते सीटें दी जानी थी, उस फार्मुले के तहत सीट नहीं मिली. चिराग का कहना है कि उस फार्मुले के तहत तो हम से ज्यादा सीट रालोसपा यानी उपेंद्र कुशवाहा को मिल गयी.

चिराग ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करके अपनी बातें रखीं. चिराग ने जिस तरह से बातें रखीं, उससे साफ होता है कि उन्होंने मीडिया से रू बर रू होने के पहले, बातें कैसे रखनी हैं, कौन से शब्द अदा करने हैं, इसका पूरा रिहलसल किया. मकसद साफ था कि वह बातें सार्वजनिक तो कर दें पर बड़े नेता नाराज न हों.

याद रखें कि सीट शेयरिंग पर अंतिम मुहर जब लगायी जा रही थी तो रामविलास पासवान वहां मौजूद थे. तब उन्होंने इसके खिलाफ एक शब्द नहीं कहा था.

लेकिन पासवान ने भले ही सीट बटवारे को हैरान करने वाला बताया पर इसी बाहाने नाराजगी तो जता ही दी. उन्होंने बार बार दोहराया कि एनडीए से अलग होने का सवाल ही नहीं.

उपेंद्र कुशवाहा खामोश

याद रखने की बात है कि पिछले दिन सीट बटवारे की फाइनल सूरत सामने लायी गयी थी. इसके तहत भाजपा 160, एलजेपी 40, आरएलएसपी 23 और हम को 20 सीटें दी गयी.

एनडीए में एक-एक कर सबने नाराजगी जता दी लेकिन ये कुशवाहा हैं जिन्होंने अब तक खामोशी अपना रखी है.

हालांकि ये कुशवाहा ही थे जो दो महीने से भाजपा नेतृत्व पर दबाव बनाते रहे थे कि सीटों का बटवारा जल्द हो. उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जतायी थी कि भाजपा अपने प्रचार में अबकी बार भाजपा सरकार का नारा देना बंद करे.

एनडीए घटक दलों की नाराजगी समय समय पर सामने आती रही है लेकिन किसी भी छोटे दल की इतनी मजाल नहीं हो रही है कि वे खुल कर अपनी बात कह सकें. लेकिन उनकी नाराजगी घुट-घुट कर जरूर जाहिर हो रही है. घुट-घुट कर नाराजगी जाहिर करने के पीछे का घुटन किस नतीजे पर पहुंचेगा. यह देखना अभी बाकी है.

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