झारखण्ड के गोड्डा खदान हादसे में 10 शव निकाले गए, राहत-बचाव कार्य जारी

झारखंड,ईस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड (ईसीएल) की राजमहल परियोजना की ललमटिया डीप माइंस में गुरुवार की रात हुए हादसे के बाद शुक्रवार की शाम तक दस शव निकाले गए। इन सभी शवों की शिनाख्त हो गई है। कोल कंपनियों समेत एनडीआरएफ की रेस्क्यू टीम राहत कार्य में जुटी है।goda

मुकेश कुमार,नौकरशाही ब्यूरो,

 

अभी करीब 30 लोग मलबे में दबे बताए जा रहे हैं मगर आधिकारिक संख्या नहीं मिली है। शुरुआती जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि स्लाइडिंग यानी ओवर बर्डन के ढहने से यह घटना घटी । ओबी ढहने के कारणों की पड़ताल की जा रही है। लापरवाही के भी साक्ष्य मिले हैं।

अब तक खान में से निकाल गए दस शव

1.संजय कुमार शाही, दरिया,लोहरदगा (झारखंड)

2.नुरुल हसन, पहाड़ी मऊगंज जिला रीवा (मध्यप्रदेश)

 

3.शकील खान, रामगढ़ (झारखंड)

 

4.विकास पटेल (गुजरात)

 

5.हरिकिशोर यादव

 

6.जावेद अख्तर, परिहार, गढ़वा (झारखंड)

 

7.राजेन्द्र यादव

 

8.नागेश्वर पासवान

 

9.ब्रजेश यादव

 

10.जय प्रकाश राय

 

प्रोजेक्ट के अधिकारी और कर्मचारी फरार बताए जाते हैं। आउटसोर्सिंग कंपनी महालक्ष्मी तथा सुगदेव अर्थ मूवर्स के जीएम संजय सिंह ने बयान दिया है कि खदान में घटना के वक्त सात गाड़ियां ही थीं। कितने लोग दबे हैं, इसका सही आंकड़ा उनके पास भी नहीं है। सूत्रों की मानें तो आउटसोर्सिंग कंपनी, कोयला कंपनी एवं डीजीएमएस अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे। सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने घटना को सुनियोजित हत्या का मामला बताते हुए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित करने की मांग की है।

 

झारखंड के मुख्य सचिव एवं डीजीपी घटनास्थल पर पहुंचे एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने घोषणा की कि मृतकों के परिजनों को 12-12 लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा। पांच लाख रुपए ईसीएल, पांच लाख रुपए आउटसोर्सिंग कंपनी तथा दो लाख का मुआवजा झारखंड सरकार देगी। शव को उनके घर तक पहुंचाने एवं घायलों के इलाज के लिए 25-25 हजार रुपए दिए जाएंगे।

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