टॉपर घोटाला: बोर्ड अध्यक्ष की राजनीतिक महत्वकांक्षा के पीछे दफ्न हो सकते हैं कई राज

12वीं परीक्षा में बिहार टॉर्पस घोटाला के बाद बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह चर्चा में हैं. इस खबर में पढिये कि श्री सिंह अपनी प्रिंसिपल पत्नी को विधायक बाने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा की कहानी.

लालकेश्वर: प्रिंसिपपल पत्नी को बनाना चाहते थे विधायक

लालकेश्वर: प्रिंसिपपल पत्नी को बनाना चाहते थे विधायक

विनायक विजेता

इंटर आर्टस और साईंस की परीक्षा में वीआर कॉलेज, कीरतपुरए वैशाली के टॉपर बने छात्र सौरभ श्रेष्ठ और रुबी राय मामले को लेकर सवालों के घेरे में आए बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह की कहानी ‘हरि अनंत हरि कथा अनंता’ की तरह है। लालकेश्वर प्रसाद सिंह की पत्नी उषा सिन्हा पिछले कई वर्षो से कंकड़बाग स्थित गंगा देवी महिला महाविद्यालय की प्राचार्य हैं।

पत्नी ने ली थी लम्बी छुट्टी

पिछले वर्ष हुए विधान सभा चुनाव के पूर्व अचानक उन्होंने एक लंबा अवकाश ले लिया था। तब उनकी जगह इसी महाविद्यालय में कार्यरत श्रीमति कंचन चकियार को प्रभारी प्रिंसिपल बनाया गया था।

विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि तब लालकेश्वर सिंह महागठबंधन के किसी दल से अपनी पत्नी ऊषा सिन्हा को टिकट दिलाने के लिए काफी प्रयासरत थे। यहां तक कि उषा सिन्हा ने टिकट पाने के लिए अपना बायोडाटा भी जमा किया था। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि तब लालकेश्वर प्रसाद अपनी पत्नी को अिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का प्रयास कर रहे थे. आज के महंगे चुनाव में अमूमन करोड़ों का खर्च होता है. सूत्र बताते हैं कि वह बायोडाटा के अलावा नेताओं को यह भी खबर भेजवा चुके थे कि वह डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करने को तैयार थे पर जब उन्हें अपने प्रयास में नाकामी मिली तो वो चुप बैठ गए।

फरवरी 2016 में उनकी पत्नी उषा सिन्हा ने फिर से गंगा देवी कॉलेज में अपने पुराने पद पर ज्वाईन कर लिया। पांच दिन पूर्व संपन्न हुए विधान परिषद चुनाव में भी अपनी पत्नी को परिषद् प्रत्याशी बनवाने के लिए लालकेश्वर लालायित थे और उन्होंने इसके लिए एक दिग्गज राजनेता से पूरी पैरवी की थी. पर भाजपा द्वारा पांचवे प्रत्याशी की घोषणा से लालकेश्वर प्रसाद का अपनी पत्नी को परिषद में भेजने का भी सपना ख्याली पुलाव बनकर रह गया।

अब सवाल यह उठता है कि अपनी पत्नी को विधायक पद पर देखने की इच्छा पालने वाले बोर्ड अघ्यक्ष के पास आखिर इतना रुपया कहां से आया या आने वाला था। इस मामले की अगर गहराई से छानबीन हो तो इस वर्ष ही नहीं पिछले वर्ष के टॉपरों और शिक्षा माफिया और बोर्ड अध्यक्ष के मिली भगत की कलई खुल जाएगी।

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