दिल जोड़ने और दर्द बांटने में विफल रहा एनडीए का भोज

बिहार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में चुनावी चेहरे और सीट बंटवारे को लेकर कुछ दिनों से चल रही खींचतान के बीच आज हुई भोज में घटक दल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा की गैर मौजूदगी ने एकजुटता पर संशय पैदा कर दिया है। 

बिहार में हाल में हुए लोकसभा की एक और विधानसभा की दो सीटों के लिए हुये उपचुनाव में राजग की करारी हार के बाद से अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में चेहरे और सीट बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गयी। राजग के प्रमुख घटक भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाईटेड, लोक जनशक्ति पार्टी और रालोसपा के बीच सीट बंटवारे के साथ ही मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर खींचतान शुरू हो गयी थी। इस बीच भाजपा ने अपने सहयोगी दलों के लिए भोज के बहाने राजनीतिक माहौल को बेहतर करने का प्रयास किया।

भोज शुरू होने से पूर्व रालोसपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री नागमणि ने कहा कि उनकी पार्टी राजग में बड़े जनाधार वाली है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को तीन सीटों पर विजय मिली थी। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा के चेहरे को लेकर चुनावी मैदान में उतरने से राजग को लाभ होगा।

 

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव एवं विधायक श्याम रजक ने कहा कि लोकसभा के चुनाव में उनकी पार्टी 25 सीट से कम पर समझौता करने वाली नहीं है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद नित्यानंद राय और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि भोज अच्छा रहा और बड़े नेताओं ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर इसका जायका लिया। विरोधी चाहे कुछ भी कहें अगले चुनाव में राजग के सभी प्रत्याशियों की जीत होगी।

भोज में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी , भाजपा के बिहार मामलों के प्रभारी भूपेन्द्र यादव, केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, केन्द्रीय मंत्री एवं लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान, केन्द्रीय राज्य मंत्री अश्वनि कुमार चौबे, सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, राज्यसभा सांसद सी. पी. ठाकुर, रालोसपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि के साथ ही नीतीश मंत्रिमंडल के सभी मंत्री भी उपस्थित थे ।

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