‘बेशर्म अणर्व! कितनी भी चमचागिरी कर लो, तुम्हारे विचार मेरे लिए ढ़ेला भर महत्व नहीं रखते’

एनडीटीवी की  एंकर बरखा दत्त ने  टाइम्स नाऊ के संपादक  अर्णव गोस्वामी को लताड़त हुए कहा कि अणर्व का बेशर्म और कायरतापूर्ण पाखंड आश्चर्यजनक है और उनकी सरकार के प्रति चमचागिरी सारी हदें पार कर चुकी हैं.

बरखा दत्त

बरखा दत्त

बरखा दत्त ने अपने फेसबुक पेज पर अर्नब पर करारा प्रहार करते हुए लिखा है कि  ‘टाइम्‍स नाऊ मीडिया के दमन की बात करता है। वो जर्नलिस्‍ट्स पर मामला चलाने और उन्‍हें सज़ा दिलाने की बात करता है। क्‍या यह शख्‍स जर्नलिस्‍ट है? उस शख्‍स की तरह ही इस इंडस्‍ट्री का हिस्‍सा होने पर मैं शर्मिंदा हूं।’

बरखा द्वरा लिखे गये फेसबुक पोस्ट का हिंदी अनुवाद- मीडिया विजिल ने किया है

“टाइम्‍स नाऊ मीडिया के दमन की बात करता है ! वह पत्रकारों पर मामला चलाने और उन्‍हें सजा दिलाने की बात करता है ! क्‍या यह शख्‍स पत्रकार है ? मैं शर्मिंदा हूँ कि मैं भी उसी की तरह इस इंडस्ट्री का हिस्सा हूँ ।

अर्नब का बेशर्म और कायरतापूर्ण पाखंड आश्चर्यजनक है। वह बार-बार पाकिस्तान से बातचीत के समर्थकों पर पिनपिना रहा है लेकिन एक भी शब्द जम्मू-कश्मीर की बीजेपी-पीडीपी वाली उस सरकार के लिए नहीं बोल रहा जिनके गठबंधन की शर्तों में पाकिस्तान और हुर्रियत से बातचीत का समझौता है। और वह मोदी पर चुप्पी साधे हुए है जो पाकिस्तान के बातचीत के मामले में हद से आगे निकल गए हैं। मुझे इनमें से किसी पर भी आपत्ति नहीं है लेकिन चूँकि अर्णब गोस्वामी किसी की देशभक्ति को ऐसे विचारों से नापता है तो पूछा जाना चाहिए कि वह सरकार पर चुप क्यों है?  चमचागीरी ?

कल्पना कीजिए कि एक पत्रकार सचमुच में सरकार पर मीडिया के एक धड़े का दमन करने के लिए दबाव बना रहा है। ऐसे पत्रकारों को वह पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसी आईसीआई का एजेंट ठहरा रहा है, आतंकियों का हमदर्द बता रहा है और कह रहा है कि उनके ऊपर मामला चलना चाहिए और सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।

और हमारी पत्रकार बिरादरी? इस बिरादरी से राजनीतिक रूप से सही-गलत बने रहने के नाते कायराना चुप्पी साध रखी है। ठीक है लेकिन डरने वालों में से नहीं हूं श्रीमान गोस्वामी। और मुझे फर्क नहीं पड़ता कि तुम अपने शो पर कितनी बार मेरा नाम सीधे या घुमाकर लेते हो क्योंकि मैं तुम्हारे विचार को ढेला भर भी अहमियत नहीं देती। मुझे उम्मीद है कि मैं तुम्हारे लिए हमेशा वही रहूंगी जिसकी पत्रकारिता से तुम घृणा करोगे। और यक़ीन करो, यह घृणा इतनी परस्पर है कि किसी भी मुद्दे पर तुम्हारी तरफ़ होने का ख़्याल भी मेरे लिए मरने जैसा होगा !”

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