मीडिया का राष्ट्रवाद और IPS संजीव भट्ट IAS खेमका व IPS अमिताभ

मोदी सरकार की आंख में आंख डालने वाले आईपीएस संजीव भट्ट पर चैनलों की चुप्पी लेकिन आईपीस अमिताभ  पर उनका राष्ट्रवादी लबादा ओढ़ने के मायने क्या हैं ?

आईपीएस संजीव भट्ट- ईमानदारी की सजा

आईपीएस संजीव भट्ट- ईमानदारी की सजा

वसीम अकर त्यागी के इनपुट से

संजीव भट्ट अपनी ड्यूटी कर रहे थे इमानदारी से कर रहे थे बगैर हिंदू मुस्लिम के चश्मे के वे सिर्फ अपना फर्ज निभा रहे थे। इसके लिये न तो उन्हें मुस्लिम परस्त कहा जा सकता है और न ही मुसलमानों का हमदर्द। मुसलमान सिर्फ उन्हें इसलिये अपना हमदर्द मानते हैं क्योंकि दंगों में मरने वाले मुसलमान थे और संजीव भट्ट ने राज्य के मुखिया की भूमिका पर सवाल उठाये थे। यही वह ‘जुर्म’ है जिसके लिये उन्हें बर्खास्त किया गया.

दर असल गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक शपथ पत्र दायर कर कहा था कि वह टाप पुलिस अफसरों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठ में मौजूद थे जिसमें मोदी ने अफसरों को गुजरात दंगों में मुसलमानों के खिलाफ हिंदुओं के गुस्से को नजरअंदाज करने के लिए कहा था. इस शपथ पत्र के बाद काफी हंगामा हुआ था और नरेंद्र मोदी की काफी आलोचना हुई थी.

आईएएस अशोक खेमका व अमिताभ ठाकुर

लेकिन इस मामले में मीडिया का बदला रवैया लोगों को चौंकाने वाला है. इसी तरह अब जरा हरियाणा के आईएएस अशोक खेमका की मिसाल लीजिए. जब ‘ईमानदारी’ से नौकरी करनेके बदले तबादले दर तबादले मिले तब मीडिया से लेकर तथाकथित राष्ट्रभक्तों का रवैय्या क्या रहा था ? बेशक वही रवैय्या होना भी चाहिये क्योंकि सजा ईमानदारी से काम करने की मिल रही है, और ईमानदार होना अपराध तो नहीं है.

तीसरा उदाहरण

एक तीसरा उदाहरण उत्तर प्रदेश के आईएएस अफसर का है. अभी पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के आईएएस अमिताभ ठाकुर और मुलायम सिंह यादव की कथित ‘धमकी’ का मामला खूब गरमाया। भाजपा ने इसे तुरंत मुद्दा बनाया बाकी कमी ‘राष्ट्रवाद’ का लबादा औढने वाले मीडिया ने कर दिया। ठाकुर का जुर्म इतना था कि उन्होंने मुलायम की धमकी को सार्वजनिक कर दिया. उसके बाद उन्हें एक महिला द्वारा यौन उत्पीड़न का आरोप लगवा गया और फिर सस्पेंड हुए. इस खबर को मीडिया ने ऐसे उठाया जैसे ईमानदार अफसर के वो ही सबसे बड़े हमदर्द हों.

तो सवाल तो उठता ही एसी ही तत्परता संजीव भट्ट के लिये क्यों नहीं ? क्या सिर्फ उस अधिकारी से ही  मीडिया की हमदर्दी है जिसका झुकाव दक्षिपंथी संगठनों की तरफ हो ?

संजीव भट्ट सरीखे, शहीद हेमंत करकरे जैसे इमानदार लोगों के साथ कोई हमदर्दी नहीं है ?

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