राजद-जदयू के बीच रिश्ता तोड़ने को सबसे ज्यादा श्याम रजक क्यों हैं बेताब?

जदयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक का बस चले तो वह कब का राजद से संबंध तोड़वा डालें. यही वजह है कि बीच बीच में वह नीतीश पर राजद से संबंध विच्छेद करने का परोक्ष दबाव डालते हैं. आज भी उन्होंने ऐसा ही बयान दिया है.

नौकरशाही अनालिसिस

 

श्याम रजक ने मंगलवार को पार्टी नेताओं की मीटिंग शुरू होने से पहले कहा कि नीतीश कुमार कभी अपनी छवि से समझौता नहीं कर सकते. रजक के इस बयान में बजाहिर कुछ भी ऐसा नहीं जिससे उन्हें घेरा जा सके लेकिन उनके इस बयान का मतलब निकालने वाले यह मान रहे हैं कि वह अपनी पार्टी पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव की राजनीति कर रहे हैं.

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर किया है. ऐसे में विपक्ष यह मांग कर रहा है कि उन्हें नीतीश मंत्रिमंडल से निकाला जाना चाहिए. इसके लिए विपक्ष नीतीश की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की दुहाई दे रहा है.

पिछले दिनों श्याम रजक ने जदयू की एक बैठक से पहले कहा था कि राजद की प्रस्तावित रैली में उनकी पार्टी के शामिल होने का कोई औचित्य नहीं है. उनके इस बयान के बाद एक हलचल मच गया था. लेकिन शाम होते होते नीतीश कुमार ने यह कह कर अटकलों पर विराम दिया था कि अगर उन्हें न्योता मिला तो वह जरूर शामलि होंगे.

आखिर जद यू के यह नेता क्यों ऐसे बयान देते हैं जिससे अटकलें तेज हो जाती हैं. दर असल कभी लालू के आंखों का तारा रहे श्याम रजक अब जद यू में हैं. वह राजद में वर्षों तक मंत्री रहे और जब जद यू में आये तो भी मंत्री रहे लेकिन जब राजद व जद यू ने महागठबनंधन बनाया तो श्याम रजक को मंत्रिपद से हाथ धोना पड़ा.

समझा जाता है कि राजद के वरिष्ठ नेतृत्व के दबाव में श्याम रजक को मंत्रिपद से वंचित किया गया था. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि श्याम रजक के अंदर अभी तक वह टीस है जिससे वह सोचते हैं कि जबतक जद यू , राजद से अलग नहीं होगा तब तक उनके दिन नहीं लौटेंगे.

हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि श्याम रजक के ऐसे बोल के लिए नीतीश कुमार ने उन्हें प्रत्यक्ष रूप से तो कुछ नहीं कहा लेकिन अपने नेताओं से कहा कि वह ऐसे बयान न दिया करें जिससे मुश्किलें बढ़ें.

 

 

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