लालू ने पूछा – ‘पेटा’ के पेट में दर्द क्‍यों नहीं होता

बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए टमटम का इस्तेमाल करने के राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की घोषणा के बाद पशुओं के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था पेटा (पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ ऐनीमल्स) द्वारा निर्वाचन आयोग को चिट्ठी लिखकर इस पर रोक लगाने की मांग पर राजद सुप्रीमो ने पलटवार करते कहा है कि आखिर रेसकोर्स में अमीरों की शर्त पर दौड़ते घोड़ों को देखकर पेटा के पेट में दर्द क्यों नहीं होता।

 

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श्री यादव ने फेसबु पर लिखा है कि रेसकोर्स में अमीरों के शर्तों पर घोड़े दौड़ते हैं तो पेटा के पेट में दर्द नहीं होता,  तब तो घोड़ों का कल्याण होता है ना। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि पेटा को बताना चाहिए कि क्या उनकी पार्टी चुनाव प्रचार के साथ ही टमटम में घोड़ों का प्रयोग शुरू हुआ या सदियों से होता आ रहा है ?

 

राजद अध्यक्ष ने कहा कि गरीबों का पेट भरने टमटम में घोड़े दौड़ रहे हैं तो पेटा के पेट में मरोड़ आने लगा। गाड़ियों के दौर में भी लोग पेट भरने को घोड़ों पर निर्भर हैं। टमटम मालिकों का अपने घोड़ों के संग परिवार सा जुड़ाव होता है, इन घोड़ों को रेस के घोड़ों की तरह बूढ़ा होने पर गोली नहीं मार दिया जाता। उल्लेखनीय है कि पेटा और एनिमल वेल्फेयर पार्टी (एडब्ल्यूपी) ने घोड़ों से चलने वाले टमटम के प्रयोग पर रोक लगाए जाने के लिए जरूरी कार्रवाई करने को लेकर चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा है।

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