लालू यादव परिवार मोह से बाहर निकल पाएंगे

बिहार विधान परिषद की विधानसभा कोटे वाली रिक्‍त एक सीट के लिए चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गयी है। चुनाव की अधिसूचना 25 अगस्‍त को जारी होगी। आवश्‍यकता पड़ने पर मतदान 11 सिंतबर को होगा। यह सीट राजद के विधान पार्षद गुलाम गौस के इस्‍तीफे के कारण रिक्‍त हुई थी। उन्‍होंने जदयू के टिकट पर मधुबनी से चुनाव लड़ने के लिए इस्‍तीफा दे दिया था, लेकिन चुनाव हार गए थे।lalu 11

 

वीरेंद्र यादव

 

राजद व जदयू में हुए समझौते के तहत जदयू ने यह सीट पर राजद के छोड़ने का निर्णय लिया है। अब सवाल है कि राजद प्रमुख इसके लिए किसे उम्‍मीदवार बनाएंगे। जैसी चर्चा है कि वह अपनी बेटी मीसा भारती को पार्टी का टिकट दे कर विधान परिषद में भेजने का प्रयास कर सकते हैं। मीसा भारती लोक सभा चुनाव में पाटलिपुत्र में हार चुकी हैं। उनके अलावा राबड़ी देवी भी सारण में चुनाव हार गयी थीं। राबड़ी देवी भी अभी विधान परिषद के सदस्‍य हैं।

 

अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्‍या लालू यादव परिवार मोह से बाहर निकल पाएंगे। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि लालू यादव ने अपने बेटे-बेटियों को स्‍थापित करने के लिए जदयू के साथ समझौता करने को तैयार हुए थे। कानूनी वजहों से वह खुद कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। गठबंधन की रानजीति में राबड़ी देवी को नेता मनवाना आसान काम नहीं है। वैसी स्थिति में लालू यादव बेटी मीसा और बेटा तेजस्‍वी की आड़ सत्‍ता के करीब बने रहना चाहते हैं। लेकिन लालू का परिवार मोह अब उल्‍टा भी पड़ सकता है। पिछले लोकसभा चुनाव में पाटलिपुत्र से मीसा भारती को टिकट देने कारण ही रामकृपाल यादव ने लालू के खिलाफ बगावत का झंडा बुंलद किया था और मीसा को पराजित करने में सफल भी रहे।

 

रामकृपाल की बगावत लालू के लिए सबसे बड़ा सबक है। यदि वह हर मौके पर अपने परिजनों को एडजस्‍ट करने में लगे रहे तो कार्यकर्ताओं में गुस्‍सा स्‍वाभाविक है। यह निर्विवाद है कि आज भी यादव वोटरों पर उनकी पकड़ है और उतना ही सच है कि उनके करीबी भी अब उनके परिवार के लिए अपने मौकों की अनदेखी करने को तैयार नहीं हैं। फिर लालू के समक्ष विकल्‍प क्‍या बचता है, यह अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्‍पष्‍ट होगा।

 

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