‘लैंड ऑफ भूमिहार’ में सशंकित थे मांझी  

मुख्‍यमंत्री जीतनराम मांझी 15 नंवबर को मुजफ्फरपुर में कांटी थर्मल पावर प्रोजेक्‍ट के उद्घाटन के मौके पर सशंकित थे। उनको आशंका थी कि उन्‍हें विरोध का सामना करना पड़ सकता है। यह आशंका उन्‍हें भाजपा की ओर से नहीं थी। सीएम भूमिहारों की भूमिका को लेकर आशंकित थे। मूलनिवासी के मुद्दे पर जिस तरह से जयदू के भूमिहार सांसद व विधायकों ने मांझी के खिलाफ बयानबाजी की थी, उसकी पुनरावृत्ति की उम्‍मीद मांझी को थी। राष्‍ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर रविवार को सीएम सचिवालय में भोजन के दौरान naukarshahi.com के साथ बातचीत में मुख्‍यमंत्री श्री मांझी ने कहा कि ‘लैंड ऑफ द भूमिहार’ मुजफ्फरपुर में विरोध का डर था, लेकिन जब भाषण शुरू किया तो लोगों ने खूब स्‍वागत किया।unnamed (2)

वीरेंद्र यादव, बिहार ब्‍यूरो प्रमुख

 

इस बातचीत में मुख्‍यमंत्री ने सामाजिक प्रताड़ना, राजनीतिक विद्वेष, पढ़ने की भूख और वोट की विवशता की कई परतें खोलीं। अपने जीवन से जुड़े कई अनुभव को उन्‍होंने मुख्‍य कार्यक्रम में भी शेयर किए थे, जिसकी चर्चा बातचीत में भी हुई।

 

‘खोसुआ मंत्री’ से नहीं होगा विकास

श्री मांझी ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बिजेंद्र बाबू (बिजेंद्र प्रसाद यादव, मंत्री) ‘शाकाहारी’ हैं। उद्घाटन समारोह में वह भी साथ में थे। लेकिन भाजपाइयों को वह जबाव नहीं दे पाते। हमने मोदी सरकार में बिहार के मंत्रियों की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा- मोदी जी के खोसुआ मंत्री से विकास नहीं होगा। हम भी राज्‍यमंत्री रहे हैं। क्‍या होती है राज्‍यमंत्री की हैसियत, हम जानते हैं। उद्घाटन समारोह में पूर्व सीएम नीतीश कुमार की उपेक्षा पर भी हमने सवाल उठाया। राजीव प्रताप रुडी ने भोजपुरी में भाषण दिए थे। हमारी बारी आयी तो हमने जनता से पूछा, मगही में भाषण दें। जनता की हुंकारी के बाद शुरू हो गए मगही में। आखिर भाजपाई समझें तो कि जीतनराम मांझी क्‍या चीज है।

 

संयम रखना सीखते जा रहे हैं

सीएम के हर बयान के विवादास्‍पद बनाए जाने के मुद्दे पर श्री मांझी ने कहा कि संयम रखना हम भी सीखने लगे हैं। हम भी पार्टी लाइन पर बोलते हैं। पार्टी लाइन से अलग थोड़े बोलते हैं। हम सभी विकास की लडाई लड़ रहे हैं। केंद्र द्वारा बिहार को कुछ दिए जाने के संबंध में उन्‍होंने कहा कि चुनाव के समय कुछ दे सकती है केंद सरकार। अखबार पढ़ने की चर्चा होने पर उन्‍होंने कहा कि ज्‍यादा नहीं पढ़ पाते हैं, लेकिन महत्‍वपूर्ण खबरें टेबुल पर आ ही जाती हैं। खबरों पर प्रतिक्रिया के संबंध में उन्‍होंने कहा कि आखिर हम भी आदमी ही हैं। एक्‍शन-रिएक्‍शन होता ही है।

 

कामेश्‍वर सिंह को नहीं भूल पाता

मुख्‍यमंत्री ने कहा कि जिनके घर उनके परिजन बनिहारी किया करते थे। उन्‍हीं के घर के थे कामेश्‍वर सिंह। उन्‍होंने हमें पढ़ाई के लिए काफी प्रेरित किया। वह आर्थिक मदद भी करते थे। लेकिन उनके परिवार के अन्‍य सदस्‍य हमारी पढ़ाई के खिलाफ थे। बाद में उसी परिवार के एक सदस्‍य ने हमारी हत्‍या की साजिश भी की, हालांकि उनका प्रयास सफल नहीं हुआ। सीएम ने बताया कि कामेश्‍वर सिंह भूमिहार जाति के थे।

 

टेकलाल का टेरर और मांझी की विवशता

1990 में फतेहपुर के विधायक थे श्री मांझी। उस क्षेत्र के आतंक थे टेकलाल यादव। टेकलाल यादव एक मांझी परिवार को काफी प्रताडि़त कर रहा था। वह परिवार विधायक जीतनराम मांझी के पास मदद के लिए आया और कहा कि धन जो गया सो गया, इज्‍जत पर भी आफत आ गयी है। लेकिन विधायक श्री मांझी टेकलाल यादव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सके। उन्‍हें लगा कि यदि हम टेकलाल का विरोध करते हैं तो हमारा 50 हजार वोट स्‍वाहा। हालांकि 1990 का चुनाव मांझी करीब दो सौ वोटों से हार गए। सीएम ने कहा कि हार के बाद भी हमें इस बात का संतोष था कि हमने अपने मांझी परिवार की मदद नहीं कर जो पाप किया था, भगवान ने उसकी सजा हमें हार के रूप में दे दी।

 

(तस्‍वीर- राष्‍ट्रीय प्रेस दिवस पर फोटोग्राफर बने मुख्‍यमंत्री जीतनराम मांझी) 

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