सनसनीखेज: भाजपा के 20 में से 16 आदर्श गांव में मुसलमान नहीं

एक अंग्रेजी वेबसाइट ने सनसनीखेज खुलासे में दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में मोदी समेत भाजपा के 20 में से 16 सांसदों ने आदर्श ग्राम के रूप में जिन गांओं को चुना है वहां मुस्लिम आबादी नहीं है.

भाजपा सांसदों को पसंद नहीं मुस्लिम गांव

भाजपा सांसदों को पसंद नहीं मुस्लिम गांव

प्रधानमंत्री ने अपनी महत्वाकांक्षी सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत जिस जयापुर गांव को गोद लिया है वहां मुस्लिम नहीं हैं. इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश में बीजेपी के ज्यादातर सांसदों ने भी ऐसा ही किया। इन्होंने उन गांवों को गोद लिया है जहां मुस्लिम नहीं हैं।

गौरतलब है कि इस स्कीम के तहत सभी सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र में एक गांव को गोद लेना है और मॉडल गांव के रूप में विकसित करना है.

अंग्रेजी वेबसाइट स्क्रॉल डॉट इन के पत्रकार धीरेंद्र के झा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भाजपा सांसदों के इस व्यवहार से मुसलमानों में मायूसी है. वेबसाइट ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश के जिन 20 सांसदों ने अभी तक जिन 20 गाओं को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने का ऐलान किया है उनमें से 16 में मुसलमानों की आबादी नहीं है. इतना ही नहीं जिन चार सांसदों ने गांवों  डुमरियागंज, हाथरस, सहारणपुर और फैजाबाद के सांसदों ने भी जिन गांवों को गोद लिया है वे भी उनमें भी हिंदुओं की आबादी बहुसंख्य है.

बीसों गांव का किया स्टडी

वेबसाइट स्क्रॉल डॉट इन का दावा है कि उसने इन तमाम गांवों का स्टडी किया है.

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 नवंबर को बनारस में जयापुर गांव को गोद लिया तो उनका चुनाव भी बिना मुस्लिम आबादी वाला गांव था। लेकिन मोदी के बाद बीजेपी सांसदों ने भी ऐसा ही किया। उन्होंने भी उन गांवों को ही तवज्जो दी जहां मुस्लिम नहीं हैं. जिन सांसदों ने मुस्लिम गांवों की उपेक्षा की उनमें अकबरपुर से सांसद देवेंद्र सिंह, बस्ती से हरीश द्विवेदी, चंदौली से महेंद्र पांडे, देवरिया से कलराज मिश्रा, एटा से राजवीर सिंह, फर्रुखाबाद से मुकेश राजपूत, फतेहपुर सिकरी से बाबुल चौधरी, घोसी से हरि नारायण राजभर, गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ, कैराना से हुकुम सिंह, कुशी नगर से राजेश पांडे, लालगंज से नीलम सोनकर, मथुरा से हेमा मालिनी, मुजफ्फरनगर से संजीव बालियान और बनारस से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।
जिन गांवों को बीजेपी सांसदों ने गोद लिया है उनमें अकबरपुर में तिकवापुर, अंबेडकरनगर में उसराहा, बस्ती में अमोधा, चंदौली में जलखोर, देवरिया में पयासी, एटा में नौरंगाबाद, फर्रुखाबाद में अमरौली रतनपुर, फतेपुर सिकरी में पुसेंता, घोसी में डुमरांव, गोरखपुर में जंगल औराही, कैराना में सुखेदी, कुशी नगर में गोपालगढ़, लालगंज में लोहारा, मथुरा में रावल, मुजफ्फरनगर में रसुलपुर जतन और बनारस में जयापुर है.

वेबसाइट के मुताबिक अचरज में डालने वाली बात तो यह है कि  जिन चार सांसदों ने जिन गांवों को चुना है जहां कुछ मुसलमान हैं उनमें से एक  आवरणपुर वह गांव है जो  आरएसएस के नेता दिनेश कुमार का पैतृक गांव है.

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