44 हजार मैरेज प्रपोजल्स से कैसे निपटेंगे तेजस्वी? उन्हें इस सलाह पर गौर करना चाहिए!

डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के पास, अब जबकि 44 हजार मैरेज प्रोपोजल्स आ गये हैं तो उन्हें इन पर गौर करने में 3666 घंटे लगेंगे.यानी कुल 458 दिन. ऐसे में इस जटिल काम को निपटाने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए?tejashwi

नौकरशाही ब्यूरो

हालांकि इतनी बड़ी संख्या में आये मैरेज प्रोपोजल को निपटाना आसान नहीं है. अगर एक प्रोपोजल के अवलोकन में न्यूनतम 5 मिनट लगते हैं तो सभी प्रस्तावों को निपटाने में दो लाख 20 हजार मिनट दरकार है. यानी कुल 3 हजार 666 घंटे. ऐसे में उन्हें विशेषज्ञों की एक कमेटि गठित करनी होगी. अगर यह कमेटि हर दिन आठ घंटे मेहनत करती है तो उसे बिना छुट्टी लिए तमाम प्रस्तावों के अवलोकन में 458दिन ननस्टाप काम करते हुए बीतेंगे. इनमें कोई संडे या होलि डे शामिल नहीं.

इस तरह इस कमेटि को न्यूनतम दो साल का कार्यकाल सौंपा जा सकता है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि यह कमेटि तमाम प्रस्तावों के अवलोकन में पूरी इमानदारी बरते, वरना प्रस्तवा देने वाली लड़कियां कमेटी की विश्वस्नीयता पर ही सवाल उठा देंगी. साथ ही इस कमेटी के गठन में देर भी नहीं की जानी चाहिए क्योंकि अगर इस कमेटि का गठन अभी किया गया तो 2018 के अक्टूबर में यह कमेटी अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपने की स्थिति में होगी. तब जा कर यह तय हो सकेगा कि इन 44 हजार प्रस्तावों में से कुछ दर्जन भर प्रस्तावों को हाईकमान ( तेजस्वी के शब्दों में गार्जियन) के पास भेजा जा सकेगा.
हाईकमान इन दर्जन भर प्रस्तावों को देख कर अपनी अंतिम स्वीकृति देगा. और इस तरह अगर हिसाब किताब लगायें तो पता चलता है कि 2018 के अंत या 2019 के आरंभ तक उपमुख्यमंत्री की शादी हो सकेगी. ऐसे में मैरेज प्रोपोजल करने वाली लड़कियों को दो साल धर्य रखना पड़ सकता है.

इसलिए हमारी राय है कि इस विशेषज्ञ कमेटी के गठन में देर नहीं की जानी चाहिए. क्योंकि धैर्य की भी कोई सीमा होती है. वैसे प्रस्तवा देने वाली लड़कियों को यह पता है कि तेजस्वी यादव समाजवादी सोच के व्यक्ति हैं. इसलिए लड़कियों को यह भी भरोसा होगा कि उनके प्रस्तावों को केवल और केवल गुण-दोष के आधार पर विचार किया जायेगा. वैसे भी लालूजी पहले ही कह चुके हैं कि तेजस्वी की शादी में जाति कोई बंधन नहीं बन पायेगी.

नोट- यह एक सलाह भर है. इसे पढ़ कर न तो प्रस्ताव देने वाली लड़कियों झुल्लाना चाहिए और न ही पाठकों को गंभीर होना चाहिए

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