हम जिंदा लाश नहीं, जिंदा कौम हैं जो हो जाये कागज नहीं दिखायेंगे-Ashfaque Rahman

हम जिंदा लाश नहीं, जिंदा कौम हैं जो हो जाये कागज नहीं दिखायेंगे-Ashfaque Rahman

नागरिकता संशोधन कानून CAA के खिलाफ काफी सक्रिय जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय संयोजोक Ashfaque Rahman ने कहा है कि कोई इस मुगालते में न रहे कि वह इस काले कानून की जद में नहीं आयेगा.

जब पांच सौ साल पुरानी बाबरी मस्जिद का खतियान हमारे पास था फिर उसे हमसे छीन ली गयी तो कौन सा कागज हमारी नागरिकता साबित कर सकता है. अगर हमारी असंवेदनशीलता के कारण एक भी शख्स डिटेंसन कैम्प में चला जाता है तो हम सब इसके जवाबदेह होंगे. यह समय घरों में बैठने का नहीं है बल्कि हर गली, हर मुहल्ले और हर चौराहे पर CAA, NPR के खिलाफ प्रदर्शन करते रहना है.


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पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक (Ashfaque Rahman) अशफाक रहमान का कहना है कि आने वाला दिन  काफी बदतरीन होने वाला है क्योंकि सरकार और आरएसएस की नियत ठीक नहीं है. मुल्क में फासिस्ट ताकतें सर उठा रही हैं और हमें आखिरी सांस तक लड़ना है. उन्होंने कहा कि आज लड़ाई जिस मुकाम पर पहुंच चुकी है अगर हम वहां से फिसले तो  फिर कभी संभलने का मौका नहीं मिलेगा. अशफाक रहमान ने जोर दे कर कहा कि यही अवसर है कि हमें अपना नेतृत्व भी आगे बढ़ाना है. नेतृत्व के विकास का ऐसा सुनहरा अवसर सदियों में मिलता है. लेकिन यह तभी संभव है जब हम संघर्ष को सफल बनायें और अपने भाइयों को डिटेंशन कैम्प में जान से रोक पाने में सफल हो जायें. लिहाजा इसका एक मात्र रास्ता यह है कि हम आंदोलन को ऊंचाइयों तक पहुंचायें.


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पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने उन तमाम संगठनों, व्यक्तियों और समुहों का स्वागत किया है जो इस आंदोलन में सरगर्म हैं. जनता दल राष्ट्रवादी भी इस आंदोलन में मजबूती से खड़ा है हालांकि पुलिस न हारुऩ नगर में हो रहे अनिश्चित कालीन धरने को हटवा दिया है लेकिन हमारे हौसल कम नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा कि शीघ्र ही फुलवारीशरीफ में धरने की शुरुआत होने वाली है. रहमान ने कहा कि हमें न तो डरना है, न रुकना है. उन्होने कहा कि हमें जिंदा लाश की तरह नहीं जिंदा कौम की तरह जीना है क्योंकि यह मुद्दा हमारे वजूद से जुडा है. हम कोई कागज नहीं दिखायेंगे चाहे जो हा जाये.

Ashfaque Rahman ने कहा कि CAA, NPR और NRC जैसे किसी काले कानून को हम नहीं मानते.  उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे काले कानून पर नागरिकों से लड़ने के बजाये कई जरूरी मुद्दें हैं जिन पर उसे काम करना चाहिए. बेरोजगार, आर्थिक संकट समेत अनेक मुद्दे हैं जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए. Ashfaque Rahman ने कहा कि इस काले कानून के सहारे मुसलमानों को डिटेंशन कैम्प में भेजने की साजिश है जिसे हम किसी हाल में स्वीकार नहीं कर सकते.

 

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