जमात पर कोर्ट के फैसले ने पोता जहरीले पत्रकारों के मुंह पर कालिख

शाहबाज़ की विशेष रिपोर्ट

तबलीगी जमात पर बॉम्बे हाइकोर्ट के फैसले ने सुधीर चौधरी, अर्णब गोस्वामी, रुबिका लियाकत जैसे पत्रकारों और उन्मादी भाजपाइयों के मुंह पर कालिख पोत दिया है.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने निर्णय दिया है की तब्लीगी जमातियों के ऊपर कोरोना संक्रमण फैलाने का इलज़ाम गलत है और उन्हें बलि का बकरा बनाया गया.

हाई कोर्ट ने मीडिया प्रोपेगंडा की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि कोरोना महामारी जैसी वैश्विक आपदा के समय ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था।

देश के विभिन्न न्यूज़ चैनलों रिपब्लिक टीवी , ज़ी न्यूज़ , एबीपी न्यूज़ और के एंकर अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, रुबिका लियाकत ने तब्लीगी जमातियों के खिलाफ काफी ज़हर उगला और इस मुद्दे पर राजनीती गरमा दी थी। बात इस हद तक आगे बढ़ी की साम्प्रदायिक उन्माद फैलाने वाले नेताओं ने जमातियों को देशद्रोही और गोली मार देने योग्य कहा था।

जन आक्रोश की आशंका खत्म करने के लिए जमात को बनाया बलि का बकरा?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने विदेशी तब्लीगी जमातियों के खिलाफ FIR को भी रद्द कर दिया जिसमे उन्हें लॉक डाउन नियमों एवं टूरिस्ट वीसा का उल्लंघन कर दिल्ली के निजामुद्दीन में धार्मिक सभा में शामिल होने पर केस दर्ज किया गया था। FIR में कुल 29 विदेशी तब्लीगी जमातियों पर भारतीय दंड विधान, एपिडेमिक डिसीसेस एक्ट,महाराष्ट्र पुलिस एक्ट, फॉरेनर्स एक्ट और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

जस्टिस टी वी नलावडे ( Justice TV Nalawade ) एवं जस्टिस एम् जी सेवलिकर ( Justice MG Sewlikar ) के डिवीज़न बेंच ने तब्लीगी जमातियों की अपील पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ FIR को रद्द कर दिया।

तब्लीगी जमात से जुड़े लोगो का कहना है की विदेश से आने वाले जमातियों के महाराष्ट्र के अहमदनगर में आने के बारे में पुलिस को सुचना दी गयी थी। लेकिन 23 मार्च से लगने वाले लॉक डाउन के कारण सभी होटल बंद हो गए थे जिसके कारण उन्हें मस्जिद में शरण लेनी पड़ी थी। इसलिए वो किसी भी गैर कानूनी गतिविधि में संलिप्त नहीं थे और उन्होंने DM के किसी भी आदेश का उल्लंघन नहीं किया था।

गौरतलब है की मार्च 2020 से भारत में कोरोना महामारी को लेकर सरकार हरकत में आयी। गोदी मीडिया के द्वारा तब्लीगी जमातियों के निजामुद्दीन में जमा होने खबर फैलने के बाद उनपर कोरोना संक्रमण फैलाने का इलज़ाम लगाकर देशद्रोही तक करार दे दिया गया था। तब्लीगी जमात के मुखिया मौलाना साद को भी ज़िम्मेदार बता कर उनका मीडिया ट्रायल होने लगा। बात इस हद तक बढ़ गई की जमातियों को देशद्रोही बताकर लोगो में सांप्रदायिक द्धेष फैलाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर अनगिनत आपत्तिजनक टिपण्णियां की गयी ।

जमातियों पर दंगाई मीडिया की जहरीली खबरों की खुली पोल, ZOOM के Factcheck में खुलासा

भाजपा के एक नेता एम् पी रेणुकाचार्य ( M.P. Renukacharya) ने दिल्ली मे धार्मिक सभा में शामिल हुए जमातियों को बिना इलाज लौटने पर गोली मारने की बात कही थी। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे ने भी तब्लीगी जमातियों को इलाज के बजाय गोली मार देने का बयां दिया था।

याद रहे की भारत में कोरोना महामारी के दौरान तब्लीगी जमात के अलावा कई धार्मिक आयोजन और हुए थे जो गैर कानूनी थे। जिसपर देश के कई बुद्धिजीवियों ने सवाल भी उठाये थे। अयोध्या में भूमि पूजन के बाद राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। जिनके संपर्क प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आये थे।

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