DIG निलंबन मामला: भ्रष्ट बनने से पहले गॉडफादर बनाना जरूरी

DIG निलंबन मामला: भ्रष्ट होने से पहले गॉडफादर बनाना जरूरी

मुंगेर के तत्कालीन DIG को दो दिन पहले जब भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया तो उन्होंने कहा मेरा कोई गॉड फादर नहीं है.

IPS Shafiul Haqe, Former DIG Munger
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Irshadul Haque

2007 बैच के IPS अफसर शफीउल हक ( Shafiul Haque) ने अपना दर्द बयां करते हुए यह भी कहा कि 27 साल की नौकरी में उनका 21 बार ट्रांस्फर हुआ. शफीउल हक पर आरोप है कि वह मुंगेर रेंज के डीआईजी रहते हुए अपने मातहत पुलिस अफसरों से मोटी उगाही करते थे.

अगर बात यह की जाये कि अधिकतर आईपीएस और आईएएस अफसर माल उगाही करते हैं, तो यह अविवेकपूर्ण होगा. लेकिन हकीकत तो यही है. नौकरशाही के गलियारे में यह अकसर कानाफूसी होती है कि अमुक आईएएस या आईपीएस अफसर करोड़ों की उगाही कर रहा है. एक अफसर दूसरे से बाजी मार लेने में लगे रहते हैं. एक हकीकत यह भी है कि सत्ता की कुर्सियों पर बैठे रसूखदार नेता भी इन अफसरों से उगाही करते हैं. कई अफसरों की मनचाही पोस्टिंग तो इसी शर्त पर होती है कि वह उगाही करके रसूखदार सफेदपोश नेताओं की झोली में डालता रहे.

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शफीउल हक भ्रष्ट थे या नहीं, अब इस मामले में उन्हें कानूनी लड़ाई से साबित करना पड़ेगा. लेकिन प्रथम दृष्ट्या जो उन्होंने गलती की वह यही थी कि उन्होंने व्हाट्सऐप कॉल करके अपने मातहत अफसर से कथित तौर पर 15 लाख रूपये की वसूली करना चाहते थे. व्हाट्सऐप कॉल रिकार्ड नहीं होता लेकिन उनके कॉल को अन्य फोन से रिकार्ड कर लिया गया. कथित तौर पर वह इस बातचीत में कहते हुए सुने जा रहे हैं कि ये रुपये ललन सिंह को देने हैं. वही ललन सिंह जो जनता दल यू के अध्यक्ष हैं. नीतीश कुमार के करीबी हैं. यह रिकार्ड पहले ललन सिंह तक पहुंचा, फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक गया. नीतीश ने जांच बिठा दी. मुख्यमंत्री ने इसकी जांच आर्थिक अपराध इकाई( EOU) से करवाई. करीब छह महीने की जांच के बाद शफीउल हक ( IPS Shafiul Haque) को सस्पेंड कर दिया गया.

और भी आईपीएस नपे

इस वर्ष ये तीसरे आईपीएस अफसर हैं जिन्हें सस्पेंड किया गया है. राकेश दुबे जो आरा के एसपी थे. बालू माफिया से उगाही के आरोप में स्सपेंड हुए. औरंगाबाद के एसपी सुधीर पोरिका पर भी बालू माफिया से उगाही का आरोप लगा था और सस्पेंड कर दिये गये. लेकिन बालू माफिया से उगाही के मामले में जो विश्वस्त सूत्र बताते हैं, उससे हैरानी होती है कि कम से कम तीन आईपीएस अफसरों ने अकूत समपत्ति अर्जित की लेकिन उनका बाल भी बाका नहीं हुआ. नौकरशाही के गलियारे में एक आईपीएस अफसर की पत्नी के किस्से इतने आम हैं कि वह खुद बालू माफियाओं से उगाही करती थीं. उन्हें अपनी जेठानी ( आईएएस की पत्नी) की तरह लखनऊ में आलीशान घर बनाना था.

विगत डेढ़ दशक में ऐसे कोई आधा दर्जन आईएएस अफसरों का ऐसा कौकस डेवलप हुआ है जो हर हाल में शीर्ष सत्ता के साथ साये की तरह बने रहते हैं. एक आईएएस अफसर के बारे में तो यहां तक चर्चा है कि उन्होंने अरबों रूपये की सम्पत्ति अर्जित कर रखी है. उनके खिलाफ कई बार आवाजें उठती रही हैं लेकिन आर्थिक अपराध इकाई हो या निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, किसी को साहस नहीं कि वह उनके खिलाफ जांच करे. एक आईएएस अफसर के बारे में तो विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव कई बार इशारों-इशारों में बता चुके हैं. उन आईएएस अफसर का काम ही उगाही करना बताया जाता है. तेजस्वी अक्सर आरसीपी टैक्स का जिक्र अपने बयानों और ट्वीट्स में करते रहे हैं.

अब हम फिर मुंगेर के तत्कालीन डीआईजी शफीउल हक पर आते हैं. शफीउल हक के इस बयान का कभी समर्थन नहीं किया जा सकता कि उन्हें इसलिए यह दिन देखने पड़े कि उनका कोई गॉड फादर नहीं. लेकिन एक कटु सच यह भी है कि ऐसे अनेक भ्रष्ट से भ्रष्ट आईएएस या आईपीएस अधिकारी हैं जो सत्ता के गलियारे में रह कर लूट मचाये रहते हैं, लेकिन उनका कोई बाल भी बाका नहीं कर सकता.

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