PFI के ठिकानों पर छापे, खाली लौटे ED कर्मियों से कहा सीजर लिस्ट देते जाओ

PFI के ठिकानों पर छापे, खाली लौटे ED कर्मियों से कहा सीजर लिस्ट देते जाओ

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‘योगी सरकार अपने खूनखराबे पर पर्दा डालने के लिए PFI पर प्रतिबंध लगाना चाहती है’

पीएफआई फंडिंग के आरोपों की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बृहस्पतिवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के चेयरमैन ओएम अब्दुल सलाम और केरल प्रदेश अध्यक्ष नसरुद्दीन एलामारोम के ठिकानों समेत। यूपी, बिहार राज्यों में 30 ठिकानों पर कार्यवाई की गई। यूपी में लखनऊ व बाराबंकी में छापा मारा गया।

उधर PFI सूत्रों ने दावा किया है कि छापे में ईडी खाली हाथ लौटी तो उसे लिखित एस्टेटमेंट लिया गया। इधर बिहार के पूर्णिया में छापामारी कर खाली हाथ लौट रहे अफसरों से कहा गया कि सीजर लिस्ट बना कर दे कर जाएं कि उन्होंने छापा में क्या पाया।

उधर मीडिया रिपोर्ट में तुक्केबाजी की गई है कि ईडी को कार्रवाई के दौरान कई अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिनकी छानबीन की जा रही है।

ईडी के सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में हिंसा के बाद ईडी ने दिल्ली मुख्यालय में एफआईआर दर्ज की थी। इसी मामले में यह छापे मारे गए हैं। धन शोधन मामले में सुबूत जुटाने के मकसद से यह कार्रवाई धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत की गई।

सलाम और एलामारोम के परिसरों पर भी कार्रवाई की गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी देश में सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों को भड़काने के आरोपों के संबंध में पीएफआई के खिलाफ जांच कर रही है।


इन राज्यों में मारा छापा आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि तलाशी अभियान तमिलनाडु में चेन्नई, मदुरई और तीनकाशी, कर्नाटक में बंगलूरू, बिहार में दरभंगा और पूर्णिया, उत्तर प्रदेश में लखनऊ और बाराबंकी, महाराष्ट्र में औरंगाबाद, पश्चिम बंगाल में कोलकाता व मुर्शिदाबाद, राजस्थान में जयपुर, दिल्ली में शाहीन बाग और केरल में कोच्चि, मलप्पुरम व तिरुवनंतपुरम जिलों में चलाया गया। इससे पहले केरल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में सीनियर असिस्टेंट सलाम और दिल्ली में पीएफआई के अन्य सदस्यों से पूछताछ की गई थी।

ओएम अब्दुल सलाम, चेयरमैन पीएफआई ने कहा है कि

ईडी की कार्रवाई छापे किसानों के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने और भाजपा सरकार की नाकामी छिपाने की कोशिश है। यह सांविधानिक संस्थानों का राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल का एक और उदाहरण है, लेकिन ऐसी कार्रवाइयों से कमजोरों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने से हमें कोई नहीं रोक पाएगा।

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