मुगल दौर की याद ताजा: बिहार में किन्नरों को मिलेगी महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी

बीते जमाने में मुगल शहंशाहों के महलों में महारानियों की खिदमत में ख्वाजासरा के नाम से जानी जाने वाले किन्नर तैनात हुआ करते थे. अब बिहार सरकार अल्पावास गृहों में  महिलाओं की सुरक्षागार्ड के रूप में तायनात किये जायेंगे.
पहले इनकी तायनाती मुजफ्फरपुर व छपरा के अल्पावास गृहों में होगी.  इस संबंध में समाज कल्याण विभाग ने  पहल करने की बात कही है. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ऐसा प्रस्ताव खुद ट्रांस्जेंडरों ने दिया था. इस मामले में ट्रांसजेंडर वेल्फेयर बोर्ड की सदस्य रेश्मा ने कहा कि सरकार के इस फैसले का वो स्वागत करती हैं, लेकिन वो चाहती हैं कि ट्रांसजेंडर की भर्ती एनजीओ की बजाय सरकार डायरेक्ट करे. सरकार के इस फैसले से करीब 200 ट्रांसजेंडर्स को रोजगार मिल पाएगा.
 

सोमवार को पटना में आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद ने इस प्रस्ताव की जानकारी दी थी.  इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बढ़िया प्रस्ताव है और इसको लेकर आगे की कार्रवाई करें.

फिल्म जोधा अकबर में किन्नर की भी भूमिका थी

 
ध्यान रहे कि कई मुगल शासकों के महलों में पुरुष सेवादारों का प्रवेश वर्जित था. लिहाजा महारानियों की खिदमत के लिए ख्वाजा सराओं को रखा जाता था. महिलाओं जैसा व्यवहार और पुरुष जैसी शारीरिक शक्ति से पुष्ट इन किन्नरों को उर्दू में ख्वाजासरा कहा जाता है.
अभी हाल ही में एक फिल्म आयी थी जोधा अकबर. इस फिल्म में जोधाबाई के अतिमहत्वपूर्ण सलाहकार की भूमिका में किन्नर को दिखाया गया है.
ख्वाजासराओं के प्रति मुगल शास्कों में साफ्ट कार्नर इसलिए भी होता था कि वे महिलाओं जैसा व्यवहार करते हैं, इससे महलों की रानियों या दूसरी महिलाओं के खिलाफ सेक्सुअल असाल्ट की कोई संभावना नहीं रहती.
15 वर्षोंं से जारी है संघर्ष
2008 में बिहार में काली हिजड़ा के नाम से चर्चित ने तब मीडिया को बताया था कि वह चाहती हैं कि मुगल पीरियड जैसा दौर फिर से लौट आये तब किन्नरों को समाज काफी सम्मान दिया जाता था.
इसके लिए काली हिजड़ा ने काफी प्रयास भी किया था.

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