शाबास पटना! मानव श्रृंखला बना रच दिया इतिहास, घरों में ताले, सड़क पर जनसैलाब

CAA-NPR के खिलाफ पटना ने मानव श्रृंखला बना कर इतिहास रच दिया. यूं कहिये  आज 25 जनवरी को इंसानी जंजीर नहीं बल्कि इंसानी दीवार खड़ी थी.

Irshadul Haque, Editor Naukarshahi.com

घर सुनसान और विरान हो गये. सड़कें इंसानों के सैलाब से पट गयीं.  मायें अपने घरों में ताला जड़ कर बच्चों के साथ सड़कों पर उमड़ पड़ीं. बूढ़े, जवान तो छोड़िये बीमार और लाचार लोग व्हील चेयर पर चलते हुए इंसानी जंजीर का हिस्सा बन गया. ना शोर, न शराबा, न धक्कामुक्की ना कोलाहल. पुलिस वाले दंग थे क्योंकि इतनी भीड़ और व भी पूरी तरह से डिसिप्लिन के साथ.

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NRC से कितना डैमेज होगा हिंदुओं का दलित, पिछड़ा व आदिवासी समाज

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पटना सिटी से ले कर गंधी मैदान का दस किलो मीटर लम्बा अशोक राजपथ ठचा-ठच इंसानी जंजीर से भर गया.

34 संगठनों का आह्वान

नागरिकता के काले कानून के खिलाफ, प्रस्तावित NPR  और पर्दे के पीछे से चलाये जाने वाले संभानित NRC के खिलाफ सीपीआई एमल, बामसेफ, इमारत शरिया, भीम आर्मी, जन अधिकार पार्टी, लोकतांत्रिक समता पार्टी, हिंदुस्तान अवाम मोर्चा समेत 34 संगठनों की अपील पर खड़ी की गयी यह मानव श्रृंखला नीतीश सरकार की हाल ही में सम्पन्न मानव श्रृंखला को कम से कम  पटना में तो  बौना साबित कर ही रही थी.

महिलायें घरों में ताल जड़ सड़क पर उमड़ीं

महज पांच दिन पहले बिहार सरकार की पर्यावरण और बाल विवाह के खिलाफ खड़ी की गयी मानव श्रृंखला पटना में गांधी मैदान के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गयी थी. करोड़ों रुपये खर्च हुए थे. लेकिन एक चवन्नी खर्च किये बिना नागरिकता के काले कानून के खिलाफ खड़ी की गयी मानव श्रृंखला ने कमाल कर दिया.

नीतीश की मानव श्रंखला को चुनौती

इस आयोजन में शामिल पटना के पूर्व मेयर अफजल इमाम ने नौकरशाही डॉट कॉम को बताया कि हमारी उम्मीदों से कहीं ज्यादा लोग इस आयोजन में शामिल हो गये. जबकि पिंदार अखबार के वरिष्ठ सम्पादक रैहान गनी ने तो यहां तक कह दिया कि जंगे आजादी के आंदोलन में इस बड़े पैमाने पर औरतें शामिल हुई हों ऐसा कोई रिकार्ड नहीं मिलता.

काबिले जिक्र है कि दिसम्बर के प्रथम सप्ताह में नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद के दोनों सदोनों से नागरिकता संशोधन कानून(CAA) पास कराया था. उसके बाद देश भर में इस कानून के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. यह आंदोलन देशव्यापी है. डेढ महीना हो चुके हैं और इस आंदोलन में शिद्दत बढ़ती ही जा रही है.

लोगों का कहना है कि इस काले कानून को मोदी सरकार को खत्म करना ही पड़ेगा. आज से चार दिन के बाद बामसेफ, सीपीआईएमएल, दर्जनों दलित संगठन समेत 34 संगठनों भारत बंद का आह्वान किया है.

 

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