पूर्व IPS संजीव भट्ट को भले ही उम्र कैद की सजा मिली हो पर गुजरात दंगों के बाद वह नायक बन कर उभरे थे

पूर्व IPS संजीव भट्ट को भले ही उम्र कैद की सजा मिली हो पर गुजरात दंगों के बाद वह नायक बन कर उभरे थे

संजीव ने हलफनामे में कहा था कि मुख्यमंत्री मोदी ने गुजरात दंगे में हिंदुओं को गुस्सा निकालने देने को कहा था

इर्शादुल हक, एडिटर नौकरशाही डॉट कॉम

गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर रहे संजीव भट्ट को भले ही आज गुजरात की अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है पर उनका दूसरा पहलु यह है कि उन्होंने गुजरात दंगों के बाद नायक के रूप में उभरे थे.

गुजरात की अदालत ने संजीव को 1990 के एक मामले में सजा सुनाई है. उन पर आरोप था कि तब दंगे में गिरफ्तार प्रभु वैसनानी नाम की गिरफ्तारी के बाद मौत हो गयी थी. इस मामले को कस्टोडियल डेथ करार देते हुए उन्हें सजा सुनाई गयी है.

मोदी के कट्टर आलोचक

संजीव भट्ट गुजरात की मोदी सरकार के कट्टर आलोचक के तौर पर जाने जाते हैं. उन्होंने एक हलफनामा दायर कर अदालत में कहा था कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की मीटिंग में मुख्यमंत्री ने गुजरात दंगों पर कहा था कि हिंदुओं को अपना गुस्सा उतारने दिया जाये. जब भट्ट ने यह हलफनामा दायर की थी तो वह अचानक सुर्खियों में आ गये थे. तब से लगातार वह विभिन्न मामलों में नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं.

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भट्ट को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था. उन पर आरोप लगाया गया था कि वह बिना सूचना के अपनी सेवा से अनुपस्थित थे. इस मामूली मामले पर उन्हें नौकरी से निकाले जाने की काफी आलोचना हुई थी. सितम्बर 2018 में उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका था और वह फिलवक्त जेल में हैं.

जस्टिस काटजू रहे हैं संजीव के फैन

प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजु संजीव भट्ट के बड़े प्रशंसक रहे हैं. उन्होंने अनेक बार संजीव को एक दिलेर और ईमानदार अफसर कहा है. काटजू ने फेसबुक पर संजीव की जांबाजी और दिलेरी की अनेक बार प्रशंसा कर चुके हैं.

 

संजीव भट्ट गुजरात काडर के आईपीएस अधिकारी हैं जो साल 2002 में गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद दोबारा गुजरात मामलों की जांच शुरू हुई थी जिसके बाद सरकार ने उन्हें साल 2015 में बर्खास्त कर दिया।

 

आइचौक में श्रुति दीक्षित    संजीव भट्ट ने कथित तौर पर 2002 में वो मीटिंग अटेंड की थी जिसमें सीएम नरेंद्र मोदी ने पुलिस वालों को कहा था कि मुसलमानों के खिलाफ गुस्सा निकलने दो और हिंदुओं को मत रोकना. इसके बारे में तत्कालीन गृहमंत्री हरेन पांड्या ने भी कहा था. बाद में हरेन पांड्या को मार दिया गया था. भट्ट ने 2011 के बाद इसी तरह के आरोप नरेंद्र मोदी पर लगाए थे. आरोप में ये कहा गया था कि हरेन पांड्या की मृत्यु को लेकर जरूरी सबूत उन्हें मिले थे, लेकिन अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने वो सब छुपाने के लिए कहा था.

संजीव भट्ट का पूरा करियर विवादों से भरा रहा है.संजीव भट्ट ने 1988 में IPS ज्वाइन किया था और 1990 से ही उनपर केस चल रहे हैं. ये मामला गुजरात दंगों के काफी पहले का है. 1990 के केस में 1995 तक कोई फैसला नहीं आया था और उसके बाद गुजरात कोर्ट ने इस मामले में स्टे लगा दिया था जो 2011 तक वैसे ही बना रहा था.

हर मोड़ पर दी मोदी को चुनौती

गुजरात दंगों की जांच करने वाले नानावती आयोग पर संजीव भट्ट ने सवाल उठाया था.  भट्ट ने तब कहा था कि ‘मुझे यह जानकारी मिली है कि आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपने के दौरान अपनी जिम्मेदारी का दुरुपयोग किया और उसने मोदी को दोषमुक्त करार दिया.’ उन्होंने कहा,‘जनसंघर्ष मंच के आवेदन को 18 सितंबर, 2009 को खारिज करते समय आयोग ने कहा था कि उसके पास कोई सामाग्री नहीं है कि जिसके आधार पर मुख्यमंत्री को सम्मन भेजा जाए.’ भट्ट ने फिर से यह मांग दोहराई कि मोदी को 2002 के दंगों के संदर्भ में पूछताछ के लिए आयोग के सामने बुलाया जाए.

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