सीमांचल के गांधी के जनाजे में उमड़ा लाखों लोगों का सैलाब, कइयों ने कहा ऐसी भीड़ नहीं देखी

अररिया के सांसद मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के जनाजे ने हाल के वर्षों में किसी भी सियासी रहनुमा के जनाजे में जुटी भीड़ का रिकार्ड तोड़ दिया. इस जनाजे की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसने हिंदु-मुस्लिम के बीच की सारी दुरियां मिटा दीं.

नम आंखों से तस्लीमुद्दीन की बिदाई

 

और तो और सीमांचल के पूरे क्षेत्र के भाजपा नेतओं से ले कर भाजपा कार्यकर्ताओं तक ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा के यह साबित कर दिया कि भले ही उनकी आपसी राजनीतिक रंजिश हो, पर मातम के वक्त में सब एक दूसरे के साथ हैं.

राजद के अररिया सांसद और बुजुर्ग नेता तस्लीमुद्दीन का शनिवार को चेन्नई के अस्पताल में इंतकाल हो गया था. जनाजे की नमाज मदरसा रहमानिया के मौलाना अनवार साहब ने पढ़ाई. जनाजे में मौजूद व बिहार के पूर्व मंत्री अब्दुल गफूर ने कहा कि हाल के दिनों में उन्होंने किसी जनाजे में इतनी भीड़ नहीं देखी. अबदलगफूर ने कहा कि जहां तक मेरी नजर जा रही थी लोग, सफ में खड़े थे. गफूर ने कहा कि खेत के खेत , छत और यहां तक कि पेड़ों पर इस दौरान लोग चढ़े दिख रहे थे.

उमड पड़ा इंसानी सैलाब

 

जनाजे में शुरू से आखिर तक शामिल रहे कांग्रेस के नेता मिन्नत रहमानी ने कहा की उन्होंने ऐसी भीड़ किसी जनाजे में बिहार में नहीं देखी. रहमानी ने कहा कि जनाजे की नमाज तस्लीमुद्दीन के पैतृक गांव सिसवन में पढ़ी गयी. इस दौरान चारों तरफ चार से पांच किलोमिटर के इलाके में जाम लगा था. लाखों लोगों की भीड़ को देखते हुए स्थानीय लोगों ने अपने अपने घरों में लोगों के लिए पानी और खाने का  इंतजाम कर रखा था. स्थानीय लोग जितने लोगों को संभव था उन्हें खाने पे बुला रहे थे. खाने पीने का इंतजाम करने वालों में मुसलमान तो थे ही, हिंदु भाइयों ने भी हर तरह के इंतजाम में लगे थे.

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सीमांचल गांधी के नाम से मशहूर तस्लीमुद्दीन ने 1959 में संसदीय राजनीति में कदम रखा था. उन्होंने सीमांचल में बांग्लादेश शर्णार्थियों के मसले को हल करा कर लोगों के दिलों में अपनी ऐसी जगह बनाई कि लोगों ने उन्हें हमेशा अपने सर पर बिठाये रखा.

आखिरी दीदार करते लोग

 

बिहार के पूर्व मंत्री अब्दलगफूर ने तस्लीमुद्दीन से अपने संबंधों का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी तस्लीम साहब से पहली मुलाकात 1981 में हुई थी.  उनकी शख्सियत इतनी ऊंची थी कि जो एकबार उनसे मिल लेता, उनका मुरीद हो जाता. गफूर ने बताया कि हालांकि तस्लीमुद्दीन साहब ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे, लेकिन अहले इल्म की वह बहुत कद्र करते थे.

उन्होंने कहा तस्लीमुद्दीन हिंदु-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे. यही कारण था कि उनके जनाजे में हिंदुओं ने न सिर्फ शिरकत की बल्कि हरे की आंखों में उनके लिए आंसू थे.

तस्लीमुद्दीन की मौत पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निजी क्षति बताया था. हालांकि नीतीश कुमार इस अवसर पर शामलि नहीं थे लेकिन उन्होंने ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री श्रवण कुमार को खास तौर पर शिरकत के लिए भेजा था. लालू प्रसाद बीती रात ही तस्लीमुद्दीन की जस्दे खाती का दीदार करने उनके गांव पहुंचे थे. इस अवसर सीमांचल के तमाम वर्तमान व पूर्व सांसदों और विधायकों ने शिरकत की. इनमें पप्पू यादव, रंजीता रंजन, संतोष कुशवाहा, बुलो मंडल, कटिहार के सांसद असरारुल हक कासमी, भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन, राजद नेता अख्तरुल इस्लाम शाहीन, फैयाज अहमद सरीखे लोग शामिल हुए.

जनाजे को बिहार सरकार ने राजकीय सम्मान के साथ सम्पन्न कराने का फैसला लिया था. इसका प्रतिनिधित्व बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने किया.

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