महिला दिवस : बेलदार की बेटी को न नइहरे सुख, न ससुराले

महिला दिवस : बेलदार की बेटी को न नइहरे सुख, न ससुराले

पटना के सब्जीबाग में एक 72 वर्षीया बुजुर्ग महिला की कहानी कभी आपको रुलाती है, कभी उनके जज्बे को देख-सुन आपका भी हौसला बढ़ाती है।

कुमार अनिल

कोई पूछे कि आदमी के जीवन में सबसे कीमती चीज क्या है? तो शायद लोग उत्तर में कहेंगे धन-दौलत या पद-प्रतिष्ठा। कुछ लोग शिक्षा को सबसे बड़ी चीज मान सकते हैं। लेकिन सब्जीबाग की घनी मुस्लिम आबादी के बीच इमरती और गाजा बेचनेवाली 72 वर्षीया वृद्धा से आप मिलेंगे, तो आपको कहना पड़ेगा कि धन-दौलत, पद-प्रतिष्ठा, शिक्षा इन सबसे बड़ी चीज है हौसला।

ये वृद्धा इस उम्र में भी पांच पोतियों और बेटा-पतोह सहित आठ लोगों के परिवार के लिए रोटी का इंतजाम करती हैं। सभी पोतियों को पढ़ा रही हैं। कोई इंटर में है, कोई टेंथ में। अपने संघर्ष की कहानी बताते-बताते वे कई बार रो पड़ती हैं। उनकी आंखों में आंसू देखकर बगल में टेलर का काम करनेवाले मंसूर आलम कहते हैं- इनकर दुख क्या बताएं। बेलदार के बेटी के न नइहरे सुख, न ससुराले सुख।

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आज हमदर्द में काम करनेवाले मोहसिन जाफरी से फोन पर बात हुई। उन्होंने सब्जीबाग की इस महिला के बारे में बताया। इन पंक्तियों का लेखक किसी बुजुर्ग मुस्लिम महिला के संघर्ष की कल्पना करते हुए सब्जीबाग से प्रकाशित उर्दू दैनिक अखबार के निकट की गली में पहुंचा, तो वहां मिलीं रामप्यारी देवी। मैंने उनसे पूछा कि मुस्लिमों से कैसा संबंध है, तो उन्होंने कहा कि सब अपने हैं। सब एक दूसरे का ध्यान रखते हैं।

रामप्यारी देवी बताती हैं कि 30 साल पहले उनके घर में खाने को रोटी नहीं थी। कभी खाना मिलता, कभी भूखे पेट रहना पड़ता। मरदाना (पति) पीता था। सब उड़ा देता था। आंखों में उभर आए आंसुओं को संभालते हुए बताती हैं कि तभी मैंने तय किया कि खुद कुछ करना होगा। एक मुन्ना जी थे, मैंने उनसे मदद मांगी और चाय की दुकान खोली। तब इस गली में एक भी चाय दुकान नहीं थी।

बाद में चाय की अनेक दुकानें खुल गई, तो पिछले 15-20 वर्षों से इमरती, गाजा और नमकीन खुद छानती हैं और बेचती हैं। आज भी रोजाना 15 घंटे काम करती हैं। सुबह पांच बजे रोज चूल्हा लीपने, झाड़ू लगाने से उनकी सुबह की शुरुआत होती है और रात आठ बजे तक काम करती हैं।

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क्या कहूं बाबू, हम नइहर के भी फकीर ही थे, यहां आकर भी वही हाल रहा। बताती हैं कि पतोह मदद करती हैं। सबसे छोटी पोती 9 वें में पढ़ती है। रिंकू नाम है। कहती हैं, मैं मर गई, तो रिंकू घर को संभाल लेगी। रिंकू महिला दिवस के बारे में जानती है। आसपास के लोग कहते हैं रामप्यारी इमरती और गाजा बहुत अच्छा बनाती हैं। आप भी इधर से गुजरें, तो इनके हौसले को जरूर सलाम करें।

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