मुजफ्फरपुर के इसी मैदान में आ कर नेताजी सुभाष ने भरा था लोगों में जोश

मुजफ्फरपुर के इसी मैदान में आ कर नेताजी सुभाष ने भरा था लोगों में जोश

मुजफ्फरपुर से जुड़ी हैं नेताजी की यादें
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1939 में मुजफ्फरपुर आए थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस
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उस वक्त कैसा था जनमानस?आइये जानें

दीपक कुमार ठाकुर
(बिहार ब्यूरो चीफ)

मुजफ्फरपुर: नेताजी सुभाष चंद्र बोस जहां भी जाते थे, वहां भारी भीड़ उमड़ती थी। वे जनमानस में ऐसा जोश भर देते, जिससे अंग्रेजों के होश उड़ जाते थे। उनकी यादों को समेटे इतिहास का एक पन्ना मुजफ्फरपुर से भी जुड़ा है। नेताजी 1939 में यहां आए थे। तब लोगों ने जीबीबी कॉलेज (अब एलएस कॉलेज) में उनका नागरिक अभिनंदन किया था।

ऐतिहासिक भाषण

आमगोला स्थित ओरियंट क्लब मैदान में उनका ऐतिहासिक भाषण हुआ था। यह अलग बात है कि आज यह मैदान अपने अस्तित्व पर आंसू बहा रहा है। साल 1990 तक यह खिलाडिय़ों का पसंदीदा मैदान था। क्लब के अध्यक्ष असित कुमार चटर्जी, उपाध्यक्ष एके पालित, संयुक्त सचिव सीआर बनर्जी बताते हैं कि यहां खेल कर दर्जनों खिलाडिय़ों को बिहार राज्य विद्युत बोर्ड, राज्य ट्रांसपोर्ट व बिहार पुलिस जैसे सरकारी विभागों में नौकरी तक मिली। लेकिन अब यहां प्रमुख खेल गतिविधियां बंद हो चुकी हैं।

नेताजी से जुड़ीं कई स्मृतियां
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नेताजी 26 अगस्त, 1939 को शहर में आए थे। उस समय के सोशलिस्ट नेता रैनन राय ने उन्हें यहां आमंत्रित किया था। शहर के क्रांतिकारी ज्योतिंद्र नारायण दास व शशिधर दास ने मोतीझील में होटल कल्याणी केबिन की शुरुआत की थी। नेताजी ने फीता काट कर उसे शहरवासियों को समर्पित किया था। वह शहर की पहली टेबल-कुर्सी व क्रॉकरीवाली चाय-नाश्ते की दुकान थी। कल्याणी केबिन के उद्घाटन के बाद उन्होंने ओरियंट क्लब व तिलक मैदान का भी मुआयना किया।

पुनरुद्धार की आस
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क्लब के सचिव अरूप कुमार बोस कहते हैं कि नेताजी की यादों को समेटे ओरियंट क्लब मैदान में पहले ग्रियर कप व मॉड कप जैसे टूर्नामेंट होते थे। समद व साहू मेवालाल जैसे खिलाड़ी इस मैदान में खेल चुके हैं। हालांकि अब वह दिन दूर नहीं, जब एक बार फिर इस मैदान पर बड़े टूर्नामेंट होंगे। इसके लिए क्लब की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। बीसीसीआइ की ओर से जल्द ही यहां क्रिकेट अकादमी खोलने की बात चल रही है।

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