‘योगी सरकार अपने खूनखराबे पर पर्दा डालने के लिए PFI पर प्रतिबंध लगाना चाहती है’

‘योगी सरकार अपने खूनखराबे पर पर्दा डालने के लिए PFI पर प्रतिबंध लगाना चाहती है’

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ( PFI) ने कहा है कि यूपी सरकार अपने खूनखरााबे पर पर्दा डालने के लिए PFI को प्रतिबंधित करना चाहती है. प्रदेश महासचिव सनाउल्लाह ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को अपने अपराध की कीमत चुकानी पड़ेगी.

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के  प्रदेश  महासचिव एम.  मोo सनाउल्लाह ने अपने एक बयान में, संगठन के बारे में यूपी पुलिस के आरोपों को बकवास और अपने किरदार पर पर्दा डालने वाला अमल बताया है।

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गौरतलब है कि योगी सरकार ने राज्य में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के लिए को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर बैन लगाने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी है.

विभाजनकारी तथा संविधान-विरोधी नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ होने वाला देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आज़ादी के बाद के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक है। देशभर में लोग इस क़ानून के ख़िलाफ इकट्ठे होकर शहरों और गांवों में सड़कों पर उतर रहे हैं। केवल बीजेपी शासित राज्यों में ही इन प्रदर्शनों को हिंसक बताकर उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है। जबकि अधिकतर राज्यों में पुलिस ने जनता के विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान किया है।
    PFI ने जारी अपने बयान में कहा है कि  केवल योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाले उत्तर प्रदेश राज्य में, पुलिस ने हटधर्मी दिखाते हुए प्रदर्शनों को खून-खराबे और तबाही में बदल दिया।
   PFI के प्रदेश महासचिव ने कहा कि हाल की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी पुलिस चीफ ने यह बताया है कि उत्तर प्रदेश राज्य ने केंद्र से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। हम इस क़दम की निंदा करते हैं, जो कि ‘अपने किरदार पर पर्दा डालने’ के सिवा कुछ नहीं है। हम उन्हें यह बताना चाहते हैं कि उनका खून-ख़राबा, निर्दोषों को प्रताड़ित करना और उनकी जायदादों को नुकसान पहुंचाना पूरी दुनिया की नज़रों के सामने है।
 PFI ने कहा कि यूपी में जो कुछ भी हुआ या हो रहा है उसे देश का बच्चा-बच्चा जानता है। देश की लोकतांत्रिक चेतना उन्हें उनके अपराधों की क़ीमत चुकाने पर ज़रूर मजबूर करेगी।
पॉपुलर फ्रंट के खिलाफ उपरोक्त कार्यवाही, राज्य में लोकतांत्रिक गतिविधियों के ख़िलाफ योगी की पुलिस का एक और तानाशाही क़दम है। देश की सभी लोकतांत्रिक ताक़तों को चाहिए कि वे आगे बढ़कर इसके ख़िलाफ आवाज़ उठाएं। हम इस राजनीतिक इंतक़ाम के ख़िलाफ क़ानूनी एवं लोकतांत्रिक तरीक़ों से लड़ाई लड़ेंगे।

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