अखिलेश ने इतिहास रचा, 12 बजे दिन से सुबह 5 बजे तक की सभा

अखिलेश ने इतिहास रचा, 12 बजे दिन से सुबह 5 बजे तक की सभा

कल दोपहर अखिलेश यादव की यात्रा गाजीपुर से शुरू हुई, जो रात भर जारी रही। सुबह साढ़े चार बजे भी सुनने को भीड़ उमड़ी। भाजपा की नींद उड़ी।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आईपी सिंह ने देर रात की सभा की तस्वीर जारी करते हुए ठीक ही कहा कि जो नींद उड़ाने का दावा कर रहे थे, उनकी खुद की नींद उड़ गयी यह दृश्य देखकर। इसकी 10 प्रतिशत जनता भी भाजपा के किसी नेता को सुनने नहीं आती। अखिलेश यादव मौजूदा भारतीय राजनीति में उगते सूरज का नाम है, जो अंधेरों में भी चमकता है।

सपा प्रमुख अखिलेश ने कल गाजीपुर में विशाल जनसभा के साथ अपनी विजय रथ यात्रा शुरू की, जो आधी रात के बाद रात एक बजे तक चलती रही। हर जगह बेहिसाब लोग, जबरदस्त उत्साह के साथ भीड़ ने अखिलेश यादव का स्वागत किया। हर सभा में भीड़ अखिलेश की हर बात पर तेज आवाज के साथ रिस्पांड कर रही थी। जब भी अखिलेश कहते, बोलो परिवर्तन लाओगे या नहीं, तो भीड़ से जवाब आता रहा लाएंगे-लाएंगे।

अखिलेश यादव ने हर सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पैदल करनेवाली घटना का जिक्र किया। कहा, प्रधानमंत्री गाड़ी में बैठकर चलते रहे और योगी पीछे-पीछे पैदल। अभी तो जनता भी पैदल करनेवाली है। इसके बाद भीड़ का शोर उठता।

अखिलेश यादव ने कल गाजीपुर में दिन के 12 बजे विजय यात्रा शुरू की। 4 बजे मऊ पहुंचे। आजमगढ़ पहुंचने में उन्हें सात घंटे लग गए। दरअसरल रास्तेभर लोग खड़े इंतजार कर रहे थे। हर जगह कुछ देर के लिए विजय रथ रोकना पड़ रहा था। अखिलेश का कारवां रात 12 बजे सुल्तानपुर पहुंचा। वे एक बजे रात में अमेठी और दो बजे रात में अयोध्या पहुंचे। 3 बजे सुबह बारांबकी पहुंचे और लखनऊ पहुंचते-पहुंचते सुबह के साढ़े चार बज गए। खास बात यह कि भाजपा जिस अयोध्या को गढ़ मानती है, वहां भी हजारों की संख्या में लोग अखिलेश का रात भर इंतजार करते रहे।

एडवोकेट मनीष पांडेय ने कहा-अखिलेश की इस यात्रा से भाजपा की नींद उड़ गई है। आज दिन भर 5 KD से लेकर भाजपा कार्यालय तक बैठक चलेगी! कई लोग तो दातुन नहीं किए होंगे खबर देखकर! कैप्टन सूर्यसेन यादव ने लिखा-अखिलेश भैया की दीवानगी का आलम रात भर चली समाजवादी विजय रथयात्रा। सुबह 4 बजे के बाद अखिलेश जी लखनऊ पहुँचे! गाजीपुर से लखनऊ पहुँचने में इतना समय शायद ही किसी नेता को लगे। रास्ते में खड़े यह लोग किराए पर नहीं थे। यह वो कार्यकर्ता थे जो अपने नेता के दीवाने हैं।

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