कंगना के बचाव में बोलकर फंस गईं मालिनी अवस्थी

कंगना के बचाव में बोलकर फंस गईं मालिनी अवस्थी

आज लोकगायिका मालिनी अवस्थी कंगना रनौत के बचाव में आईं। लेखक अशोक पांडेय ने पूछा, सुल्ली डील पर चुप क्यों थीं? बेनकाब हुआ मालिनी का सांप्रदायिक चेहरा।

लोकगायिका मालिनी अवस्थी का सांप्रदायिक चेहरा आज बेनकाब हो गया। जबसे कंगना रनौत ने 1947 की आजादी को भीख और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद असली आजादी मिलने की बात कही है, तभी से उनके खिलाफ सोशल मीडिया में हंगामा है।

कंगना का विरोध करते हुए व्यक्तिगत टिप्पणी किए जाने से आहत मालिनी अवस्थी ने ट्वीट करके महिला के सम्मान की बात उठाई। इस पर लेखक अशोक कुमार पांडेय ने कहा कि किसी महिला का अपमान करना गलत है, लेकिन जब मुस्लिम महिलाओं को सुल्ली डील एप के जरिये नीचता की हद पार करते हुए अपमानित किया जा रहा था, तब आप कहां थीं?

मालिनी अवस्थी ने ट्वीट किया-कंगना के आज़ादी वाले बयान पर आपत्ति कीजिये,असहमति जताइए, क्रुद्ध होइए, यह आपका अधिकार है, लेकिन, नफरत के कीचड़ में गिरे हुए लोग सोशल मीडिया पर कंगना के ऊपर जिस तरह की अभद्र बेहूदी टिप्पणियां पोस्ट कर रहे हैं, वह बेहद घटिया हरकत है! कमज़ोर आदमी की निशानी है, औरत पर कीचड़ उछालना!

मालिनी के जवाब में लेखक अशोक कुमार पांडेय ने ट्वीट किया-सहमत हूं इस मुद्दे पर। लेकिन काश, आप कभी उस सुल्ली डील पर भी बोलती जिसमें हमारी साथियों की बोली लगाई जा रही थी। सिलेक्टिव ग़ुस्सा क्रूरता और घृणित साम्प्रदायिक सोच का अभद्र प्रदर्शन है।

प्रवीण पराशर ने ट्वीट किया-सुल्ली डील्स तो छोड़ दीजिए, विराट कोहली की बेटी के बारे में एक बेरोजगार नफरती ने जो कहा उसका विरोध भी घंटा किसी ने किया। विराट कोहली को छोड़ दीजिए, यति ने स्मृति ईरानी और बीजेपी की महिला नेताओं के बारे में जो कहा उसका तो क्या ही कहना। पता नहीं लोग ऐसे कैसे बन जाते हैं।

ट्रू इंडियन ने लिखा-ये @maliniawasthi खुद भी कंगना से कम नहीं। मुझे समझ नहीं आता कि अगर इन लोगों को देश से इतना ही प्यार है तो इनकी पूरी गैंग में से किसी ने भी कंगना के विरोध क्यों नहीं किया। इनके लिए भाजपा ही देश है और मोदी ही भगवान हैं। अब कुछ नहीं बचा तो महिला विक्टिम कार्ड लेकर बैठ गए!!!

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