शराबबंदी : RJD ने नीतीश सरकार के सबसे बड़े दावे की खोली पोल

शराबबंदी : RJD ने नीतीश सरकार के सबसे बड़े दावे की खोली पोल

शराबंबदी की सफलता साबित करने के लिए काफी प्रचार के बाद एक धाारणा बनाने नीतीश सरकार कामयाब रही थी। अब राजद ने आंकड़ों के साथ खोल दी पोल।

सड़क पर कपड़ों में लिपटा शव वैशाली की उस दलित लड़की का है, जिसे जाति शेष के दबंगों ने अगवा कर लिया था। छह दिन बाद उसकी लाश मिली।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमन्ना की गंभीर टिप्पणी पर लोग अभी विचार ही कर रहे थे कि राजद ने आंकड़ों के साथ उस मिथक की कलई खोल दी, जिसे नीतीश सरकार ने काफी प्रचार के बाद गढ़ा था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समाज सुधार यात्रा कर रहे हैं। वे हर सभा में दुहराते हैं कि शराबबंदी महिलाओं के कहने पर ही लागू की गई और इससे सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं को ही हुआ है। वे हर सभा में जोर देकर कहते हैं कि शराबबंदी के कारण प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं में बहुत कमी आई है। मुख्यमंत्री यह बात अपनी हर सभा में तो बोलते ही हैं, अखबारों और टीवी में प्रचार पर करोड़ों खर्च करके इसे स्थापित करने की कोशिश भी गई। एक हद तक लोगों में यह परसेप्शन बनाने में सरकार कामयाब भी रही, लेकिन राजद ने आज आंकड़ों के साथ पोल खोल दी।

राजद ने कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ी हैं। इसके लिए राजद ने सरकार का ही आंकड़ा प्रदेश की जनता के सामने रख दिया। राजद ने ट्वीट किया- बिहार में महिलाओं के ख़िलाफ अपराध बेतहाशा बढ़ रहा है। नीतीश कुमार और महिला विरोधी RSS/BJP को आँख खोलकर आँकड़े देखने चाहिए। NCRB और बिहार पुलिस का डेटा उठा कर 2015-2020 तक महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध का ग्राफ़ देखिये। क्यों जातिवादियों, यह जंगलराज की श्रेणी में नहीं है ना??

मालूम हो कि वर्ष 2016 में नीतीश सरकार ने शराबबंदी कानून लागू किया। उसके बाद के चार वर्षों में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं में कमी नहीं आई, बल्कि इजाफा हुआ।

शराबबंदी से पहले 2015 में दुष्कर्म के मामलों की तुलना करें, तो सिर्फ 2016 में ये मामले घटे हैं, लेकिन उसके बाद हर साल दुष्कर्म के मामले बढ़े हैं। 2015 की तुलना में 2019 में यह काफी बढ़ गया। इसे इस ग्राफ से समझा जा सकता है, जो बिहार पुलिस का है और जिसे राजद ने जनता के सामने पेश किया है।

जिनके लिए ताली बजाई, उनकी ठुकाई हो रही, कुछ तो बोलिए..

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