वो सीटें, जहां मायावती सपा से ज्यादा भाजपा को करेंगी डैमेज
यूपी में प्रथम चरण में 10 फरवरी को होने वाले चुनाव में मायावती सपा को डैमेज तो करेंगी पर उनके प्रत्याशी भाजपा को भी भारी नुकसान पहुंचायेंगे. पढ़िए विश्लेषण.
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प्रथम फेज में 10 फरवरी को होने वाले मतदान में 58 सीटें शामिल हैं. चुनाव आयोग ने 14 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.21 फरवरी तक नामांकन किया जायेगा जबकि 24 को स्क्रूटनी और 27 को नामांकन वापस लिया जा सकेगा.
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इस बार देखने से जो लग रहा है उससे पता चलता है कि सीधा टक्कर भाजपा और सपा गठबंधनों के बीच है. कांग्रेस और बसपा लड़ाई में पिछड़ रही हैं. लेकिन बसपा ने टिकट वितरण में करीब 22 प्रतिशत टिकट मुसलमानों को दिया है. इसी तरह दलितों और अन्य जातियों को उनकी आबाादी के अनुपात में टिकट दिया है जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि बसपा, समाजवादी गठबंधन को भारी नुकसान पहुंचायेगी.
इसी आधार पर सपा के वरिष्ठ नेता बसपा पर आरोप लगा चुके हैं कि वह भाजपा से मिली हुई है. ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि क्या वाकई मायावती की बहुजन समाज पार्टी ( BSP) सिर्फ समाजवादी पार्टी के गठबंधन को नुकसान पहुंचा रही है? या उसके उम्मीदवारों की जो सामाजिक पृष्ठभूमि है वह भाजपा की भी नींद हराम करने वाली है.
आइए हम यहां कुछ विधान सभा क्षेत्रों को सेम्पल के तौर पर पेश करते हैं;-
किठौर विधान सभा, मेरठ
इस विधान सभा सीट में मुसलमान वोटरों की संख्या 75 हजार है. त्यागी वोटरों की संख्या 30 हजार जबकि गूर्जर मतदाता 35 हजार हैं.
भाजपा ने सत्यवीर त्यागी को उम्मीदवार बनाया है जबकि सपा-आरएलडी ने शाहिद मंजूर को मैदान में उतारा है. बसपा ने कुशाल पाल मावी को खड़ा किया है.2017 में भाजपा के सत्यवीर त्यागी ने शाहिद मंजूर को मात्र दस हजार वोटों से हराया था. त्यागी को 89 हजार तो मंजूर को 79 हजार वोट मिले थे. ऐसे में बसपा के उम्मीदवार से सबसे ज्यादा खतरा भाजपा को ही है. यादवो, जाट और मुसलमानों ने अगर मंजूर के पक्ष में जम कर वोट कर दिया तो मंजूर की जीत तय है.
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कैराना, मुजफ्फर नगर
कैराना की सीट भी इस बार भाजपा की राह को, बसपा ने मुश्किल बना डाला है. आरएलडी के निवर्तमान प्रत्याशी नाहिद हस की बहन इकरा को उतारा है. जबकि भाजपा ने मृगांका को फिर मैदान में उतारा है. जबकि बसपा ने ब्रह्मण प्रत्याशी राजेंद्र उपाध्याय को टिकट दिया है. ऐसे में जातीय समीकरण पर नजर डालने से पता चलता है कि इकरा की जीत आसान है.
जातीय समीकरण
कुल वोटर: 3 लाख के करीब- ब्राह्मण: 11 हजार (3.5%) क्षत्रिय: 4,800 वैश्य: 7,000 मुस्लिम: 1,30,000 (43.19%) गुर्जर: 25 हजार (11%) कश्यप: 34 हजार (11.65%) SC: 36 हजार (12.15%).
ऐसे में भाजपा और बसपा की लड़ाई में कैराना की सीट पर आरएलडी का पलड़ा भारी दिख रहा है.
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स्याना विधान सभा, बुलंदशहर
सपा-रालोद की तरफ से दिलनवाज खान मेैदान में हैं. वह पिछली बार नम्बर दो पर थे. बसपा के टिकट पर लड़े थे. इस बार बसपा ने सुनील भारद्वाज को इस बार उतारा है. जबकि भाजपा ने अपने निवर्तमान विधायक देवेंद्र सिंह पर भरोसा जताया है. पिछली बार वोटों का ध्रुवीकरण हुआ था इसलिए देवेंद्र जीत गये थे. चूंकि यहां पर मुस्लिम और जाट वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है इसलि आरएलडी के जाट नेतृत्व का असर हुआ तो दिलनवाज खान की जीत पक्की हो सकती है.
जातीय समीकरण
मुसलमान 58 हजार. जाट 50 हजार. लोध 62 हजार. गूर्जर 17 हजार हैं. जबकि ब्रह्मण व अन्य जातियों में किसी की भी संख्या 15 हजार से अधिक नहीं है. ऐसे में जाट , मुसलमान और गूर्जर की एकता ने रंग दिखाया और बसपा के सुनील भारद्वाज ने ब्रह्मणों व अन्य जातियों के वोट काटे तो दिलनवाज की जीत आसान हो जायेगी.
बरौली विधान सभा क्षेत्र
भाजपा ने यहां से जयवीर सिंह को टिकट दिया है, जो पिछले चुनाव में बसपा के टिकट पर दूसरे स्थान पर रहे थे। इन्हें मिले 86 हजार से ज्यादा वोट मिले थे. लेकिन इन वोटों में दलितों का बड़ा योगदान था. लेकिन इस बार ऐसा होगा, गारंटी नहीं है. रालोद ने प्रमोद गौड़ को उतारा है। जबकि बसपा ने नरेंद्र शर्मा को उतारा है.
जातिगत समीकरण
लगभग 3 लाख 55 हजार मतदाता हैं। यहां मुस्लिम 40 हज़ार, वैश्य 3 हज़ार, ब्राह्मण 27 हज़ार, ठाकुर (क्षत्रिय) 60 हज़ार, अन्य जनरल 7 हज़ार, जाट 22 हज़ार, कुम्हार 5 हज़ार, लोधी 45 हज़ार,
ऐसा नहीं है कि बसपा सिर्फ के प्रत्याशियों के चयन से सिर्फ भाजपा में ही खलबली है. अनेक सीटें ऐसी हैं जहां बसपा के कारण सपा-आरएलडी को भी नुकसान होगा. इन सीटों पर ध्यान दें.
बुढ़ाना विधान सभा
इस विधान सभा में कुल सवा तीन लाख मतदाताओं में मुस्लिम मतदाताओ की संख्या 80 हजार के करीब है. जाटव 30 हजार तो जाट 25 हजार हैं. जबकि गूर्जर वोटरों की संख्या 32 हजार है.
भाजपा से उमेश मलिक मैदान में हैं. निवर्तमान विधायक हैं. जबकि सपा-RLD से राजपाल बालियान मैदान में हैं और बसपा से हाजी मोहम्मद अनीश को उतारा है. अगर मुसलमानों का वोट बसपा ने काटा और उन्हें जाट वोटर का सहयोग नहीं मिला तो सपा आरएलडी को नुकसान होगा.
चरथावल विधान सभा मुजफ्फरनगर
सीट पर मुस्लिम वोटर ज्यादा हैं। रालोद को सपा के इस वोटबैंक का फायदा मिलने की उम्मीद है। मगर बसपा का मुस्लिम प्रत्याशी वोटकटवा साबित हो सकता है। फायदा भाजपा को होगा।
कुल सवा तीन लाख वोटरों में मुस्लिम वोटरों की संख्या एक लाख 60 हजार के करीब है. 30 हजार जाट और 20 हजार ठाकुर हैं.
भाजपा से सपना कश्यप, सपा-आरएलडी से पंकज मलिक मैदान में हैं. लेकिन बसपा से सलमान सईद को टोकट देकर सपा गठबंधन को पहले ही मुश्किल में डाल दिया है.
खतौली, मुजफ्फरनगर
82हजार मुस्लिम वोटर्स वाले मुजफ्फरनगर की इस सीट पर बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी मुजाहिद सिद्दीकी को खड़ा करके सपा-रालोद गठबंधन को कड़ी चुनौती दी है. यहां से सपा रालोद के राजपाल सिंह उम्मीदवार हैं जबकि भाजपा ने विक्रम सैनी को टिकट दिया है.
जातिगत समीकरण
खतौली सीट पर 82 हजार मुस्लिम, 57 हजार चमार, 27 हजार सैनी, 19 हजार पाल और करीब 17 हजार कश्यप वोटर हैं. ऐसे में मुसलमानों ने सपा को सपोर्ट नहीं किया तो बसपा की जीत आसान हो जायेगी.
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