भगवा आतंकियों को क्यों नहीं दी जाती फांसी?

जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय संयोजक अशफाक रहमान ने इस बात पर गहरी चिंचा जताई है कि मुसलमानोें को आतंकवाद के नाम पर फांसी तो लटका दिया जाता है पर भगवा आतंकियों को फांसी नहीं दी जाती.

अशफाक रहमान

अशफाक रहमान

रहमान ने कहा कि देश का बहुसंख्यक वर्ग इस बात के लिए चिंतित है कि याकूब मेमन की फांसी को भगवा ब्रिगेड ने धार्मिक चश्मे में देखा. वरना सरकारें इंसाफपसंद होतीं तो गुजरात के नोरदा पाटिया केस की गुनाहगार और गुजरात की तत्कालीन मंत्री माया कोडनानी को भी फांसी हो चुकी होती.

माया कोडनानी को भी दो फांसी

रहमान ने एक बयान में कहा कि दुनिया जानती है कि गुजरात की मंत्री रही माया कोडनानी को सितम्बर 2013 में गुजरात सरकार ने एसआईटी को फांसी की सजा के लिए अपील करने से रोक दिया था.तब नरेंद्र मोदी खुद गुजरात के सीएम थे. याद दिलाऊं कि माया कोडनानी जिस नरोदा पाटिया केस की गुनाहगार हैं उसमें 96 मुसलमानों को कत्ल कर दिया गया था. इसी मामले का गुनाहगार बाबू बजरंगी भी था.

जहां तक याकूब मेमन की बात है तो उन्हें सरकारी गवाह बनाने की शर्त पर भारत लाया गया था. लेकिन मेमन की फांसी ने सरकार की नीयत को बेनकाब कर दिया है. अभी राष्ट्रपति के पास  राजीव गांधी के कातिलों, पंजाब के मुख्यमंत्री रहे बेअंत सिंह के कातिलों को भी फांसी की सजा  के गुनाहगारों की फाइलें पड़ी हैं उन्हें फांसी पर न लटकाना भाजपा सरकार पिक ऐंज चूज की घिनावनी नीति को उजागर करती है.

अशफाक रहमान ने कहा कि कत्ल हिंदू का हो या मुसलमान का, कत्ल तो कत्ल है. पर मुसलमानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि गुजरात के दो हजार से ज्यादा मुसलमानों के कत्ल करने वाले या तो जेल की सलाखों से बाहर मौज कर रहे हैं या फिर उनकी फांसी की सजा के लिए सरकार ने अपील करने से भी जबरन रोक दिया. कई आईपीएस अफसरों को जो दंगा फैलाने में शामिल थे और सस्पेंडेड थे उन्हें सजा के बजाये प्रमोशन दिया गया.

मुसलमानों की जान की कीमत कुछ नहीं?

रहमान ने सवाल किया कि  क्या मुसलमानों की जानों की कोई कीमत नहीं. सवाल यह है कि माया कोडनानी और बाबू बजरंगी को बचाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार क्यों आगे आ गयी? ऐसे में यह कैसे उम्मीद की जा सकती है कि समझौता एक्सप्रेस विस्फोट और माले गांव में मरे मुसलमानों को इंसाफ मिलेगा? याकूब मेमन को हड़बड़ी में फांसी तो दे दी गयी लेकिन कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जैसे भगवा आतंकियों को कब फांसी होगी. या सिर्फ इस मुल्क के मुसलमान ही आतंकवाद के नाम फांसी पर चढ़ते रहेंगे?   अगर ये केंद्र सरकार जरा भी खुद को जिम्मेदार समझती है तो राजीव गांधी, बेअंत सिंह के कातिलों और मुम्बई व गुजरात दंगों के कातिलों को भी फांसी पर लटकाये.

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