हिन्‍दी भवन के ‘लुटेरों’ की कब होगी पहचान

फणीश्वरनाथ रेणु हिन्दी भवन, पटना में 2008 से चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान चलता रहा। एक-दो माह पहले यह संस्थान मीठापुर स्थित अपने कैंपस में चला गया, लेकिन हिन्दी भवन को जहां-तहां से किसने नोच लिया गया है। फणीश्वरनाथ रेणु हिन्दी भवन के अंदर की हालत देख साफ लगता है कि किसी ने हिन्दी के साथ बेरहमी दिखायी है।  सरकार ने इस लूट (!) पर अब तक कोई एफआईआर तक क्यों नहीं की?  ये जनता के पैसे का हिन्दी भवन है।hw

प्रणय प्रियंबद, आई नेक्सट, पटना 

 

जाबिर हुसेन की परिकल्पना थी

हिन्दी भवन की पूरी परिकल्पना तत्कालीन विधान परिषद सभापति जाबिर हुसेन की थी। उन्होंने जमीन उपलब्ध करवाने से लेकर भवन निर्माण और उसमें फर्नीचर से लेकर एससी और बेड शीड तक का सारा इंतजाम कर दिया था। खूबसूरत ऑडिटोरिम, उसमें कुर्सियां, साउंड की मशीने, कुर्सियां सब का इंतजाम कर दिया। ठहरने के कई कमरे से लेकर कांफ्रेंस हॉल तक। किचन से लेकर टायलेट बाथरूम तक। पूछिए क्या नहीं था हिन्दी भवन के पास। परिकल्पना के अनुरूप आगे काम हुआ होता तो देश-विदेश के बड़े संस्थान के रूप में इसकी पहचान बनती। लेकिन सरकार को ये गंवारा नहीं था। नीतीश सरकार ने हिन्दी के नाम पर बने इस भवन को चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान को दे दिया। 2008 से 2015 तक इसमें प्रबंधन संस्थान चलता रहा। लेकिन जब मीठापुर में प्रबंधन संस्थान का भवन बन गया तो संस्थान वहां चला गया। हिन्दी भवन की कई चीजें भी उखाड़ ले गए.

 

कुर्सियां भी हुईं गायब

आडिटोरियम में तीन सौ के लगभग कुर्सियां थी, सोफे थे। कौन ले गया। अब जब हिन्दी दिवस (14 सितंबर) का दिन आया तो दो-तीन दिनों पहले कुर्सियां और सोफे भेजे गए हैं। पता नहीं फिर से ले जाएंगे या क्या करेंगे। अभी मुश्किल से करीब 150 कुर्सियां हैं। जानकारी के अनुसार गेस्ट रूम में 16 बेड थे। कौन ले गया। इसमें तीन किंग बेड भी थे जिसमें से दो ले गए। लाइब्रेरी में 89 रैक थे सब ले गए।  अब तो लगता ही नहीं कि ये लाइब्रेरी भी है। कॉमन रूम में 32 चेयर थे ले गए। कांफ्रेस रूम में भी उजड़ा हुआ सा है। लगभग 80 चेयर थे, अभी मुश्किल से 25-27 होंगे। कांफ्रेसिंग के लिए माइक लगे थे। उखाड़ कर ले गए। कई कमरों में आपको बिजली के तार नोचे हुए मिलेंगे। मेस का डायनिंग टेबल ले गए। चार-पांच एसी उखाड़ ले गए। इसके लिए कई जगह तारों को काटा गया।

स्‍पष्‍टीकरण

इस संबंध में सीआइएमपी के निदेशक डॉ वी मुचककंद दास ने बताया कि हमने ऑडिटोरियम के सारे सामान वापस कर दिए। आप जिस एसी की बात कर रहे हैं, वे हमने लगवाए थे। उसे हम ले आए। हम वही सामान लेकर आए जो हमारे थे। बाकी वहीं छोड़ दिया।

सीआईएमपी के मीडिया प्रभारी विष्‍णु ने कहा कि  बहुत सारा सामान हैंडओवर किया जा चुका है। अभी इसकी प्रक्रिया चल ही रही है। हमने बिजली का कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। इंटरनेट का कनेक्शन हटाया गया है। सीलिंग हमलोगों ने करवायी थी,  उसे नहीं हटाया है। हम पारदर्शी तरीके से सब कुछ कर रहे हैं।

 

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