बिहार इंपैक्ट : झारखंड में हेमंत ने सरेंडर करने से किया इंकार

बिहार इंपैक्ट : झारखंड में हेमंत ने सरेंडर करने से किया इंकार

जो हेमंत सोरेन राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमित शाह से मिले और झुकते लग रहे थे, अब भाजपा से दो-दो हाथ करने को तैयार। यह है बिहार इंपैक्ट। झारखंड में सरगर्मी।

झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। दोपहर में यूपीए की बैठक हुई। शुक्रवार देर शाम दोबारा बैठक होगी। कहा जा रहा है कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अयोग्य करने का पत्र राज्यपाल को दिया है। राजभवन ने इस मामले में अब तक कुछ नहीं कहा है, लेकिन भाजपा के एक सांसद ने चुनाव आयोग के ऐसे पत्र की चर्चा की है।

राजनीतिक गहमागहमी के दो पक्ष हैं एक तकनीकी तथा दूसरा राजनीतिक। तकनीकी पक्ष में कई बातें कही जा रही हैं कि हेमंत सोरेन इस्तीफा देकर फिर से सरकार बनाने का दावा कर सकते हैं। किसी दूसरे के मुख्यमंत्री बनने की भी चर्चा जोरों पर हैं, लेकिन सबसे अहम है इसका राजनीतिक पक्ष।

जो हेमंत सोरेन राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के साथ खड़े हुए थे, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर रहे थे और माना जा रहा था कि ईडी-सीबीआई के दबाव में वे भाजपा के आगे झुकने को तैयार हैं, अब वही हेमंत सोरेन ने भाजपा के खिलाफ तोल ठोंक दिया है। उनके अलावा आदिवासियों के बड़े नेता और चंपई सोरेन सहित कई आदिवासी नेता सीधे भाजपा को चुनौती दे रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस बदले हुए रुख को बिहार इंपैक्ट भी माना जा रहा है।

चंपई सोरेन ने कहा-लगातार चार उपचुनावों में हारने के बाद, पिछले दरवाजे से, लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई झारखंड सरकार को अस्थिर करने की इस कोशिश को पूरा देश देख रहा है। हमें सत्ता खैरात में नहीं, बल्कि जन-समर्थन से मिली है। जब तक जनता साथ है, कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा।

जमशेदपुर के सामाजिक कार्यकर्ता विनोद लहरी ने नौकरशाही डॉट कॉम को बताया कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने का झारखंड की राजनीति पर गहरा असर हुआ है। बिहार में भाजपा को सत्ता से बाहर करने को साहसिक कदम के रूप में देखा जा रहा है और इसका भाजपा विरोधी दलों पर सकारात्मक असर पड़ा है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा और उसके नेता हेमंत सोरेन भाजपा पर बेहद आक्रामक हैं। आदिवासी नेता चुनौती दे रहे हैं कि तुम्हारे पास ईडी है, सीबीआई है, लेकिन जनता का समर्थन कहां से लाओगे। जेएमएम ने इसे आदिवासी अस्मिता और झाऱखंड के विकास के खिलाफ साजिश माना है और वे सीधे जनता में जा रहे हैं। जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच हेमंत सरकार ने नौकरी से लेकर कई बड़ी घोषणाएं भी की हैं। एक बात तो तय है कि अब झामुमो केंद्र सरकार और भाजपा से लड़ने को तैयार है।

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