‘बेरोज़गारी के नाम पर तेजस्वी ने चुनाव के लिए डाटा जमा किया’ : बीजेपी नेता

‘बेरोज़गारी के नाम पर तेजस्वी ने चुनाव के लिए डाटा जमा किया’ : बीजेपी नेता

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बेरोज़गारी पर आक्रामक राजनीति के साथ राज्य में बेरोज़गारों का डाटा इकठ्ठा कर लिया है. तेजस्वी ने युवाओं के भविष्य में अपना भविष्य देखने का साहसिक राजनीतिक निर्णय लिया है. वहीं सत्तापक्ष की चिंता बढ़ गयी है क्यूंकि यह वोट में भी बदल सकता है.

बता दें कि तेजस्वी यादव ने हाल ही में राज्य के बेरोज़गारो के लिए एक वेब पोर्टल और एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया था. जिसपर सिर्फ नौ दिन के भीतर ही 5 लाख से ज़्यादा बेरोज़गारो ने रोज़गार के लिए अपना बायोडाटा अपलोड किया है. वही टोल फ्री नंबर पर 10 लाख से ज़्यादा लोगो के कॉल आ चुके है. लेकिन बेरोज़गारी राष्ट्रीय जनता दल का चुनावी मुद्दा होगी यह तो फरवरी में ही तय हो गया था जब तेजस्वी ने बेरोज़गारी हटाओ पदयात्रा कर संकेत दिए थे.

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तेजस्वी लगातार सोशल मीडिया एवं संवाददाता सम्मेलनों में रोज़गार को लेकर बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार के खिलाफ आक्रामक राजनीति कर रहे है . पोर्टल के लांच के समय उन्होंने कहा था कि बिहार में 7 करोड़ युवा बेरोज़गार है. उन्होंने 4 लाख बेरोज़गार युवाओं को रोज़गार देने का वादा भी किया। वही भाजपा और जदयू के नेता लालू यादव के 15 साल की बात कर रहे है. भाजपा के नेता का आरोप है कि तेजस्वी ने बिहार चुनाव के लिए डाटा इकठ्ठा करने के लिए बेरोज़गारी अभियान शुरू किया था.

बेरोज़गारी, पलायन, शिक्षा और कृषि ऐसे मुद्दे है जिनसे बिहार के युवाओं का भविष्य सीधे तौर पर जुड़ा है. बिहार की आबादी का बड़ा हिस्सा युवा है जिनका वोट बहुत महत्वपूर्ण है. फिर भी युवा मुद्दों की राजनीति साहसिक फैसला कहा जा सकता है क्यूंकि परंपरागत रूप से बिहार को जातीय राजनीति के लिए जाना जाता है. तेजस्वी के बेरोज़गारी अभियान लालू यादव के MY (Muslim+Yadav) के समीकरण के अलावा एक और प्रोटेक्शन लेयर के तौर पर भी देखा जा सकता है.

पार्टी सूत्रों के अनुसार तेजस्वी राज्य में बेरोज़गारी पर डाटा चाहते थे इसलिए उन्होंने पोर्टल लांच किया जिससे वह चुनावी रणनीति बना सकें और राजद की सरकार बनने पर प्राथमिकता के आधार पर बेरोज़गारी का समाधान किया जा सके.

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राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि वेब पोर्टल पर जिस तरह से आवेदन मिल रहे है उससे यह पता चलता है कि बिहार की जनता के लिए रोज़गार कितना बड़ा मुद्दा है. जब डाटा उपलब्ध होता है तब सरकार की योजनाएं सही ढंग से काम करती है.

जेडीयू नेता राजीव रंजन ने कहा कि तेजस्वी यादव नीतीश सरकार के कमी को न निकालें. 15 साल के आरजेडी के शासन में 95 हज़ार लोगों को रोजगार मिला. नीतीश कुमार के शासन में 7 लाख लोगों को रोजगार मिला. इसके अलावा लोगों को कार्यकुशल बनाने पर ज़ोर दिया गया.

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