जो दूसरे को देशद्रोही बता रहे थे, खुद फंसे #DeshDrohiModiShah

जो दूसरे को देशद्रोही बता रहे थे, खुद फंसे #DeshDrohiModiShah

पहली बार ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है #DeshDrohiModiShah । 20 हजार ट्वीट हो चुके हैं। जो दूसरे को देशद्रोही बता रहे थे आज उन्हीं के खिलाफ चल रहा ट्रेंड।

फोटो-छत्तीसगढ़ के मंत्री टीएस सिंहदेव के ट्वीट से।

ट्विटर यूजर्स चकित हैं। आज पहली बार ट्विटर पर देशद्रोही मोदी शाह #DeshDrohiModiShah ट्रेंड कर रहा है। 2014 से 2019 तक #राजद्रोह के 326 मामले दर्ज हुए। इसमें सिर्फ छह लोगों को सज़ा हुई। मोदी सरकार के कार्यकाल में राजद्रोह मुकदमे का धड़ल्ले से इस्तेमाल हुआ। इसमें मानवाधिकार कार्यकर्ता, जेएनयू,जामिया के आंदोलनकारी छात्र से लेकर स्टेन स्वामी जैसे बुजुर्ग भी शामिल थे। आज पहली बार खुद प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री के खिलाफ #DeshDrohiModiShah चल रहा है।

दरअसल आज ही संसद परिसर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस से कहा कि इजराइल ने खुद पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर को हथियार की श्रेणी में रखा है। इसका इस्तेमाल आतंतवाद के खिलाफ किए जाने के लिए इसे विकसित किया गया। राहुल ने कहा कि जिस हथियार को आतंकवाद और अपराध के खिलाफ इस्तेमाल किया जाना था, उसे मोदी सरकार देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है। इसके लिए एक ही शब्द है-देशद्रोह।

राहुल गांधी के इस आरोप के बाद आज शाम को देशद्रोही मोदी-शाह ट्रेंड करने लगा। कांग्रेस सोशल मीडिया के राष्ट्रीय संयोजक गौरव पांधी ने ट्वीट किया-लोकतंत्र के स्तंभ- विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका और मीडिया। सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई, चुनाव आयोग, चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, सांसद, पत्रकार के खिलाफ इस साइबर हथियार का इस्तेमाल करके मोदी और साह ने दरअसल भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। ये दोनों देश के इनेमी (दुश्मन) हैं।

ऑल अंडिया महिला कांग्रेस ने राहुल गांधी के बयान का एक हिस्सा ट्वीट किया- क्या आप पेगासस खरीद सकते हैं, क्या मैं पेगासस खरीद सकती हूं? पेगासस को केवल कोई देश की सरकार खरीद सकती है। पाइल पर कम से कम गृहमंत्री का हस्ताक्षर होना चाहिए। प्रधानमंत्री भी हस्ताक्षर कर सकते हैं। पेगासस एक सरकार दूसरी सरकार को बेचती है।

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कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बड़ा बयान दिया। कहा-काश, सरकार ने देश के दुश्मनों की जासूसी की होती, तो उरी, पठानकोट, पंपोर, अमरनाथ यात्रा पर हमले नहीं होते; पुलवामा में आरडीएक्स नहीं पहुंच पाता और हमारे 45 जवानों की जान बच जाती। शर्म आनी चाहिए ऐसी सरकार को जो अपने ही देश के नागरिकों की जासूसी विदेशी मदद से करती हो।

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