लालू से मिले पवार, विपक्षी एकता में होगी लालू की भूमिका!

लालू से मिले पवार, विपक्षी एकता में होगी लालू की भूमिका!

आज राजद प्रमुख लालू प्रसाद से मिलने पहुंचे एनसीपी प्रमुख शरद पवार और समाजवादी पार्टी के प्रधान महासचिव प्रो. राम गोपाल यादव। आखिर क्या बात हुई?

दिल्ली में आज लालू प्रसाद की देश के दो बड़े नेताओं से मुलाकात हुई। एनसीपी के प्रमुख शरद पवार और समाजवादी पार्टी के प्रधान महासचिव प्रो. राम गोपाल यादव लालू प्रसाद से मिलने पहुंचे। यह मुलाकात एक खास समय में हुई है, इसलिए इसका राजनीतिक महत्व है। पेगासस जासूसी मामले की सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच कराने तथा तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के सवाल पर विपक्ष संसद में आक्रामक है।

इससे पहले ममता बनर्जी ने कई नेताओं से मुलाकात की। वे सोनिया गांधी से भी मिलनेवाली हैं। प्रधानमंत्री मोदी के सात साल के कार्यकाल में न विपक्ष कभी इतना एकजुट और आक्रामक था और न ही भाजपा और खुद प्रधानमंत्री मोदी कभी इतने डिफेंसिव थे।

यहां बड़ा सवाल यह है कि इस एकता को 2024 के लोकसभा चुनाव तक बनाए रखने और भाजपा को संयुक्त चुनौती देने के लिए विपक्ष किस प्रकार आगे बढ़े। ठीक यहीं लालू प्रसाद की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। देश के सारे गैर भाजपा दलों के प्रमुख से लालू प्रसाद के अच्छे रिश्ते रहे हैं।

2024 में संयुक्त रूप से भाजपा का मुकाबला करने की रणनीति क्या हो, इस पर मंथन शुरू हो गया है। लालू प्रसाद भाजपा विरोधी एकता के मजबूत स्तंभ हो सकते हैं। शरद पवार और प्रो. राम गेपाल यादव लालू प्रसाद की प्रतिष्ठा, अन्य दलों से उनके संबंध से वाकिफ हैं।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार विपक्षी एकता के एक धुरी हैं। लेकिन उन्हें भी पता है कि भविष्य में लालू प्रसाद की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। लालू प्रसाद का जितना अच्छा संबंध कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से है, उतना ही बेहतर संबंध ममता बनर्जी से भी है।

विपक्षी नेताओं के साथ लालू प्रसाद की जो तस्वीर सोशल मीडिया में आई है, उसमें लालू प्रसाद पहले से स्वस्थ दिख रहे हैं। वे सबके साथ खड़े हैं। इससे पहले उनकी तस्वीर कुर्सी पर बैठे हुए ही आती रही है।

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आज दिल्ली की राजनीति जिस प्रकार गर्म है और भाजपा के खिलाफ सारे दल एक होकर संसद को चलने नहीं दे रहे तथा पेगासस जासूसी माले में जिस तरह आक्रामक हैं, उससे लालू प्रसाद को जरूर संतोष होगा। वे देश के उन चुनिंदा नेताओं में एक हैं, जिन्होंने कभी भाजपा के सामने झुकना कबूल नहीं किया।

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