संभल जाइए, सरकारी जमीन से घास नहीं छील सकते, पुलिस ने छीना

संभल जाइए, सरकारी जमीन से घास नहीं छील सकते, पुलिस ने छीना

यह मजाक नहीं है। सच है। अब घास भी ठेके पर दिए जा रहे हैं। कुछ महिलाएं गाय-गोरू के लिए घास काट कर ले जा रही थीं। पुलिस ने छीना। रोईं महिलाएं।

फोटो-हिल मेल से साभार

दूध-दही-मट्ठा और अस्पताल में रूम लेने पर ही टैक्स नहीं लगेगा, बल्कि अब पुलिस ने घास ले जा रही गरीब महिलाओं से घास छीन लिया। कहा कि वे घास नहीं ले जा सकतीं। उन्हें घास लेना है, तो ठेकेदार से खरीदना होगा। फिलहाल यह मामला भाजपा शासित उत्तराखंड का है। आश्चर्य नहीं कि यह नियम दूसरे राज्यों में भी लागू हो। जब दूध पर टैक्स लग सकता है, तो घास पर क्यों नहीं?

आज सुबह से एक वीडियो वायरल है, जिसे उत्तराखंड भाकपा माले की पत्रिका लिबरेशन से जुड़े संजय शर्मा ने सोशल मीडिया पर डाला है। इसमें कई पुलिसवाले एक महिलाओं से घास छीन रहे हैं। उन्होंने कहा-ये उत्तराखंड भाजपा सरकार की घस्यारी कल्याण योजना है। अब घास सरकारी ठेकेदार से खरीदनी होगी, महिलाएं अपने गांव-जंगल की घास खुद नहीं ले सकतीं। गैर कानूनी है। देखिए वीडियो-

पत्रकार प्रशांत टंडन ने कहा-किसी कंपनी बहादुर की सरकार है देश में इस वक़्त। घास भी सरकार की है। निर्लज्जता की हद है। उधर, इस वीडियो के सामने आने के बाद प्रदेश में हंगामा है। इनेक संगठनों ने कहा कि जिन महिलाओं ने अलग प्रदेश के लिए लंबा संघर्ष किया, उन्हीं महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में गृहमंत्री अमित शाह ने इस योजना को हरी झंडी दी थी। तब कांग्रेस ने इसका विरोध किया था।

कई लोगों ने आशंका जताई है कि इस तरह की योजना अन्य राज्यों में भी शुरू की जा सकती है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान गरीब वर्ग को होगा, जब आजीविका के लिए घर में एक-दो पशु पालते हैं। जो व्यावसायिक स्तर पर डेयरी बना कर दूध उत्पादन कर रहे हैं, उन्हों भले ही फायदा हो, पर गरीबों को नुकसान होगा।

वैसे भी दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि रेवड़ी वाली संस्कृति बंद करनी होगी। अर्थात कुछ भी मुफ्त नहीं मिलेगा। इसके बाद कल ही दूध-दही पर टैक्स की घोषणा हो गई। इसी आधार पर कई लोग कह रहे हैं कि अब सरकारी जमीन पर घास को बी सरकार ठेके पर दे देगी।

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