साहित्य सम्मेलन के १००वें स्थापना-दिवस समारोह का उद्घाटन करेंगे गवर्नर

 बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के १००वें स्थापना दिवस समारोह की सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई है। आगामी १७ दिसंबर को मनाए जा रहे इस महोत्सव में सम्मेलन के शताब्दी-समारोह का भी उद्घाटन बिहार के महामहिम राज्यपाल लालजी टंडन करेंगे।

कवि सत्य नारायण, प्रो अमरनाथ सिन्हा तथा खगेंद्र ठाकुर को ‘शताब्दी–सम्मान‘

पटना,१३ दिसम्बर । बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के १००वें स्थापना दिवस समारोह की सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई है। आगामी १७ दिसंबर को मनाए जा रहे इस महोत्सव में सम्मेलन के शताब्दी–समारोह का भी उद्घाटन बिहार के महामहिम राज्यपाल लालजी टंडन करेंगे। इस अवसर पर, सम्मेलन की सर्वोच्च मानद उपाधि ‘विद्या–वाचस्पति‘अलंकरण से श्री टंडन को विभूषित किया जाएगा।‘बिहार–गीत के रचनाकार और हिन्दी प्रगति समिति, बिहार के अध्यक्ष कवि सत्य नारायण,ख्याति–लब्ध विद्वान और साहित्य सेवी प्रो अमरनाथ सिन्हा, सुप्रसिद्ध समीक्षक डा खगेंद्र ठाकुर समेत कई विशिष्ट विद्वानों को ‘साहित्य सम्मेलन शताब्दी–सम्मान‘से विभूषित किया जाएगा। समारोह में विश्रुत विद्वान और साहित्य सम्मेलन, प्रयाग के अध्यक्ष डा सूर्य प्रसाद दीक्षित, माननीय सांसद डा सीपी ठाकुर,स्वागताध्यक्ष और सांसद रविंद्र किशोर सिन्हा,प्रो शशि शेखर तिवारी समेत अनेक विद्वान भाग लेंगे।

सम्मेलन भवन में आज आयोजित एक संवाददाता–सम्मेलन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि, उद्घाटन–समारोह में, महामहिम द्वारा सम्मेलन के शताब्दी–वर्ष की दिन–पत्री(वार्षिक–कैलेंडर),जिसमें पूरे वर्ष आयोजित होने वाले कार्यक्रम के विवरण भी होंगे,सम्मेलन के प्रधान मंत्री डा शिववंश पाण्डेय की दो पुस्तकों, ‘भाषा साहित्य विमर्श‘ और‘साहित्य, धर्म और संस्कृति‘ , विद्वान लेखक डा अर्जुन सिंह ‘आदित्य‘की दो पुस्तकों ‘सहज गीतामृत‘ और ‘अष्टावक्र गीता‘ , कवयित्री पूनम आनंद की पुस्तक ‘अर्णव‘,सम्मेलन के अर्थ मंत्री योगेन्द्र प्रसाद मिश्र की पुस्तक ‘वेदांत हिन्दी पद्यागम‘ तथा डा मनोज कुमार वर्मा की पुस्तक‘डा राजेंद्र प्रसाद की विरासत‘ का लोकार्पण किया जाएगा। शताब्दी–वर्ष में प्रकाशित होने वाले ‘सम्मेलन का इतिहास‘, ‘बिहार की साहित्यिक प्रगति‘ नाम से प्रकाशित होने वाले सम्मेलन अध्यक्षों द्वारा अधिवेशनों में दिए गए अध्यक्षीय भाषण का संकलन, ‘बिहार के साहित्यकार‘ (साहित्यकारों का कई खंडों में प्रकाशित होने वाला परिचय–ग्रंथ)तथा सम्मेलन साहित्य के शताब्दी–अंक के आवरण–पृष्ठ का लोकार्पण भी किया जाएगा। 

डा सुलभ ने बताया कि, शताब्दी–वर्ष में पूरे वर्ष होने वाले कुल ७७ कार्यक्रमों का स्वरूप तय कर दिया गया है, जिनमें सम्मेलन का ४०वाँ महाधिवेशन,देश भर के १०० विद्वानों का सम्मान, १०० विदुषियों का सम्मान, १०० युवाओं का सम्मान, १०० वृद्ध जनों ( लगभग सौ वर्ष पूरा करने वाले) का सम्मान, विराट राष्ट्रीय–कवि–सम्मेलन,राष्ट्रीय कवयित्री सम्मेलन, शताब्दी–व्याख्यान–माला समेत अनेक संगोष्ठियों के आयोजन सम्मिलित हैं। इनमें केंद्रीय मंत्रीगण, अन्य प्रदेशों के महामहिम राज्यपाल एवं शीर्षस्थ विद्वानों को आमंत्रित किया जाएगा। 

संवाददाता सम्मेलन में, सम्मेलन के उपाध्यक्ष नृपेंद्र नाथ गुप्त, डा शंकर प्रसाद, डा मधु वर्मा, सम्मेलन के प्रधानमंत्री डा शिववंश पाण्डेय, योगेन्द्र प्रसाद मिश्र, राज कुमार प्रेमी, प्रो वासुकी नाथ झा, आचार्य आनंद किशोर शास्त्री, डा शालिनी पाण्डेय, पूनम आनंद, पुष्पा जमुआर,कृष्ण रंजन सिंह,अमरेन्द्र कुमार,चंद्रदीप प्रसाद,डा मेहता नगेन्द्र सिंह, अर्चना त्रिपाठी,आराधना प्रसाद, डा आर प्रवेश, शमा कौसर,श्रीकांत व्यास,पूनम सिन्हा श्रेयसी,सुमेधा पाठक, आनंद किशोर मिश्र, कवि घनश्याम, सुनील कुमार दूबे, डा सुलक्ष्मी कुमारी, रमेश कँवल, डा सुधा सिन्हा,परवेज़ आलम, ओम् प्रकाश पाण्डेय ‘प्रकाश‘,पं गणेश झा, डा उमेश शुक्ल, श्रीकांत सत्यदर्शी, वीना अम्बषट्, निशिकांत मिश्र, गौरव अग्रवाल,श्रीकांत व्यास तथा पुरुषोत्तम कुमार समेत सम्मेलन के अधिकारी और कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित थे। 

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