गोदी मीडिया की लाइन पर आया दैनिक भास्कर, देखिए हेडिंग

गोदी मीडिया की लाइन पर आया दैनिक भास्कर, देखिए हेडिंग

दैनिक भास्कर अब फिर से गोदी मीडिया की लाइन पर आ गया है। कल 14 विपक्षी दलों के सांसद किसान संसद में पहुंचे। इस खबर के साथ देखिए अखबार का सलूक।

दैनिक भास्कर ने कुछ दिन दिलेरी दिखाई, लेकिन अब फिर से गोदी मीडिया की लाइन पर आ गया है। कल दिल्ली में 14 विपक्षी दलों के सांसद किसान संसद पहुंचे। उन्होंने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का समर्थन किया। यह देश के लिए बड़ी बात थी। और किसी अखबार के दिल्ली संस्करण के लिए यह पेज वन की खबर तो बनती ही है।

किसान संसद में 14 दलों के सांसदों के पहुंचने की खबर को दैनिक भास्कर ने पहले पन्ने पर छापने के बजाय इसे पेज नंबर 11 पर छापा है। खास बात यह कि अखबार में दो पेज वन है। यह चलन तब शुरू हुआ था, जब महत्वपूर्ण खबरें ज्यादा हो जाएं। बाद में यह विज्ञापन के लिए किया जाने लगा।

पहली बात तो यह कि भास्कर ने इस खबर को पेज 11 देश-विदेश में छापा और दूसरी खास बात इसकी हेडिंग है। अखबार ने हेडिंग बनाई है- किसान संसद पहुंचा विपक्ष, न मंच पर बैठने दिया, न बोलने दिया। यह हेडिंग पाठकों के साथ अपराध करना है। यह सरासर झूठ परोसा गया है।

भास्कर की हेडिंग से लगता है कि राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसद मंच पर बैठना चाहते थे और किसानों ने बैठने नहीं दिया। राहुल गांधी भाषण देना चाहते थे और किसानों ने बोलने नहीं दिया। जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। सांसदों ने न मंच पर जाने की इच्छा जताई और न ही भाषण देने की। फिर यह बात पिछले आठ महीने से पूरा देश जानता है कि किसान आंदोलन के मंच पर किसी राजनीतिक दल के नेता को नहीं जाने दिया जाता। आज तक किसी राजनीतिक दल के नेता ने मंच से भाषण भी नहीं दिया है।

हेडिंग से लगता है कि किसानों ने विपक्ष के नेताओं को कोई महत्व नहीं दिया। जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। यू-ट्यूब पर अनेक वीडियो हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि किसान नेताओं ने विपक्षी सांसदों के किसान संसद में पहुंचने का स्वागत किया। किसान नेता यह भी कह रहे हैं कि विपक्ष ने संसद में किसानों की आवाज उठाई है। वे बहस की मांग कर रहे हैं, पर सरकार नहीं मान रही।

आप गौर करेंगे, तो उसी खबर के बॉक्स में दो और खबरें हैं, उनमें भी सरकार के पक्ष को महत्व दिया गया है।

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