मोदी के हनुमान Chirag अगले विस्तार में बनेंगे मंत्री!

मोदी के हनुमान Chirag अगले विस्तार में बनेंगे मंत्री!

सबको उम्मीद थी कि लोजपा अध्यक्ष Chirag Paswan हाजीपुर में अपने भविष्य के रास्ते का खुलासा करेंगे, पर वे चुप ही रहे। क्या है उनकी चुप्पी का राज?

लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने चाचा पशुपति पारस के विद्रोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिना नाम लिये उनसे मिली निराशा जाहिर की थी। 25 जून को उन्होंने कहा था कि जब उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब प्रधानमंत्री या भाजपा ने साथ नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि एकतरफा प्रेम नहीं चल सकता। वही चिराग 10 दिन बाद जब हाजीपुर पहुंचे, तो प्रधानमंत्री और भाजपा के रुख पर चुप्पी साध ली। आखिर क्या वजह हो सकती है?

दिल्ली में चिराग ने प्रधानमंत्री और भाजपा से जो निराशा प्रकट की थी, उसे देखते हुए बिहार में राजद ने उनकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया। खुद तेजस्वी यादव ने चिराग को खुला ऑफर दिया। कहा कि चिराग को तय करना है कि वे पिता स्व. रामविलास पासवान और डॉ. आंबेडकर के रास्ते पर चलेंगे या गोलवरकर के विचारों के साथ रहेंगे।

इस बीच खबर आई की चिराग पासवान गुजरात किसी से मिलने गए। कहा गया कि यह व्यक्तिगत यात्रा थी। वहां से लौटने के बाद फिर उन्होंने प्रधानमंत्री और भाजपा से कभी क्षोभ नहीं जताया। बिहार आकर भी उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी या भाजपा के बारे में अबतक एक शब्द नहीं कहा। चिराग ने तेजस्वी के ऑफर पर भी चुप्पी साध रखी है।

पांच जुलाई के कार्यक्रम की खबर छह जुलाई को अखबारों में प्रकाशित हुई। लोजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के स्व. रामविलास पासवान के प्रति श्रद्धांजलि की खबर को शेयर किया, लेकिन विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने राजद कार्यालय में स्व पासवान को श्रद्धांजलि दी, इस खबर को शेयर नहीं किया। स्पष्ट है कि चिराग का रुख अब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की तरफ ही है।

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राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भाजपा की तरफ से चिराग को आश्वासन मिला है कि अभी इंतजार करें। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें एडजस्ट किया जाएगा। तबतक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नाराजगी भी कुछ कम हो जाएगी। ऐसा मानने के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि लोजपा के पास छह प्रतिशत वोट है। बिहार में पासवान समाज की आबादी भी लगभग इतनी ही है। यह सामाजिक आधार चिराग के साथ ही है। इसलिए लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा की कोशिश होगी कि वह इस वोट को अपने साथ रखे। तो क्या चिराग अभी नहीं, लेकिन दो साल बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बनेंगे?

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