सांप्रदायिक पत्रकारिता के प्रतीक सुभाष चंद्रा को राजस्थान ने खदेड़ा

सांप्रदायिक पत्रकारिता के प्रतीक सुभाष चंद्रा को राजस्थान ने खदेड़ा

हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत फैलानेवाली पत्रकारिता को आज बड़ा झटका लगा। भाजपा के समर्थन से राज्यसभा चुनाव में उतरे सुभाष चंद्रा को राजस्थान ने खदेड़ दिया।

देश में सांप्रदायिक पत्रकारिता के प्रतीक सुभाष चंद्रा राज्यसभा चुनाव में भाजपा के समर्थन से राजस्थान पहुंचे थे। जीत के बड़े-बड़े दावे किए थे। क्रास वोटिंग कराने का भाजपा को अनुभव भी रहा है। लेकिन सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा देनेवाली जहरीली पत्रकारिता को राजस्थान ने खदेड़ दिया। भाजपा के ही विधायक ने कांग्रेस को वोट दे दिया। अपनी हार निश्चित देख मीडिया मालिक सुभाष चंद्रा ने गिनती शुरू होने से पहले ही राजस्थान विधानसभा से भाग खड़े हुए।

मतगणना के बाद राजस्थान राज्यसभा चुनाव का परिणाम घोषित हो गया है। यहां से कांग्रेस के तीनों प्रत्याशी मुकुल वासनिक, रणदीप सिंह सूरजेवाला और प्रमोद तिवारी चुनाव जीत गए हैं। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने न सिर्प अपने विधायकों का वोट सुनिश्चित किया, बल्कि भाजपा का एक वोट तोड़ भी लिया।

जनसत्ता के पूर्व संपादक और वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने कहा- राजस्थान ने सुभाष चंद्र को राज्यसभा चुनाव में हराकर सांप्रदायिक पत्रकारिता के प्रश्रय/संचालन को ख़ारिज किया है। नागेंद्र नाथ मिश्रा ने कहा-दूसरे के घर में मतभेद का लाभ लेने गए और अपने घर में ही नुक़सान कर गए।

कौन हैं सुभाष चंद्रा : सुभाष चंद्रा जी-न्यूज के फाउंडर हैं। उनके जी न्यू को लोग जानते हैं कि वह किस प्रकार सांप्रदायिक राजनीति का जहर बोता है। सुभाष चंद्रा पहवे भी भाजपा के सहयोग से राज्यसभा का सदस्य थे।

भाजपा को राजस्थान ही नहीं, कर्नाटक में भी झटका लगा है। हरियाणा में भी वह कांग्रेस का वोट तोड़ने में विफल रही है। जी न्यूज के मालिक की हार को जोड़ कर देखें, तो राज्यसभा चुनाव सांप्रदायिक राजनीति के लिए बुरे दिन साबित हुआ। सुभाष चंद्रा की हार पर अनेक पत्रकारों ने खुशी जताई है।

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