26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड की इजाजत देकर फंसी मोदी सरकार

26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड की इजाजत देकर फंसी मोदी सरकार

केंद्र के सामने दो ही रास्ते थे। या तो बल प्रयोग करके किसानों को रोकना या ट्रैक्टर के साथ आने का रूट देना। रूट देकर उसने नई मुसीबत मोल ली।

कुमार अनिल

केंद्र की मोदी सरकार ने 26 जनवरी को किसानों को दिल्ली के भीतर ट्रैक्टर परेड करने की इजाजत दे दी है। उसने अच्छा किया कि बल प्रयोग करके किसानों को रोकने के बजाय किसानों को परेड निकालने की इजाजत दे दी। लेकिन इससे उसकी परेशानी खत्म होनेवाली नहीं है, बल्कि बढ़ने वाली है।

किसानों की जैसी तैयारी है, उससे लगता है इस बार 26 जनवरी को किसान ट्रैक्टर परेड अभूतपूर्व होगा। हजारों ट्रैक्टर पंजाब-हरियाणा से चल चुके हैं। रास्ते भर-भर के ट्रैक्टर दिल्ली आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान से भी बड़ी संख्या में ट्रैक्टर आ रहे हैं। तो पहली बात यह कि परेड बहुत विशाल होने जा रहा है।

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दूसरी बात यह कि 26 जनवरी, जिसे किसान नेता किसान गणतंत्र परेड कह रहे हैं, ने किसानों की गोलबंदी बढ़ा दी है। इस किसान परेड में पंजाब-हरियाणा के हर घर से कम से कम एक सदस्य को दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया गया है। हर गांव के जत्थे में कम से कम 11 महिलाएं होंगी। हर गांव से कम से कम पांच ट्रैक्टर दिल्ली के लिए कूच करने का आह्वान किया गया है।

तीसरी बात यह कि 26 जनवरी किसान परेड को लेकर अन्य राज्य के किसानों में भी उत्साह बढ़ गया है। नासिक से दसियों हजार किसान मुंबई के लिए पैदल निकल पड़े हैं। कर्नाटक के किसान भी 26 को बेंगलुरु में ट्रेक्टर मार्च निकालेंगे।

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चौथी बात यह कि दिल्ली पहुंच रहा हर ट्रैक्टर तिरंगे से सजा है। सजाने में किसानों ने अभिनव (इनोवेटिव) प्रयोग किए हैं। 1952 के गणतंत्र दिवस की तस्वीरों साझा की जा रही हैं, जब परेड में ट्रैक्टर भी शामिल था। यह हरित क्रांति का प्रतीक बना। तो ट्रैक्टर और तिरंगे की जोड़ी का राजनीतिक संदेश भी देश महसूस करेगा।

किसान कह रहे हैं कि इस किसान परेड को देश कभी नहीं भूल पाएगा। यह इतिहास में दर्ज होगा।

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