सत्तालोभी नेता और बिकाऊ पत्रकारों की हवस से बड़ा है देश

तेजस्वी बोले, नहीं चाहिए शहादत की सौदेबाजी करने वाली देशभक्ति

तेजस्वी यादव ने पुलवामा में शहीद जवानों की शहादत का चुनावी लाभ लेने का मुद्दा उठाकर आरएसएस को घेरा, कहा नकली देशभक्ति की जरूरत नहीं।

बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने अर्णब गोस्वामी के वाट्सएप चैट से उजागर हुई बातों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर सवाल बताया है। उन्होंने कहा कि ये कैसी देशभक्ति है, जहां हमारे वीर जवानों की शहादत को टीआरपी और चुनावी फायदे के लिए इस्तेंमाल किया गया। उन्होंने पूरे प्रकरण की संसदीय समिति से जांच की मांग की है। उन्होंने अर्णब को नकली पत्रकार करार दिया और कहा कि अपने फायदे में वह सत्ता के साथ सांठगांठ करके देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

तेजस्वी ने यह भी कहा कि हमारे देश को माफीनामे और शहादत की सौदेबाजीवाली देशभक्ति की जरूरत नहीं है। उनका इशारा आरएसएस की तरफ है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान संघ के नेताओं पर अंग्रेजों से माफी मांगने के आरोप लगते रहे हैं। वहीं पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद जवानों की शहादत को चुनाव में जिस तरह भुनाया गया, वह भी अर्णब के वाट्सएप चैट से उजागर हो गया है।

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तेजस्वी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि अर्णब बात-बात पर विरोधी दलों के नेताओं को अपमानित करते रहे हैं। आज उनका सच देश के सामने आ गया है। उन्होंने कहा-सत्तालोभी नेताओं और बिकाऊ पत्रकारों की हवस से बड़ा है देश।

गौर करने वाली बात है कि जो अर्णब रोज दूसरों को देशविरोधी होने का सर्टिफिकेट दिया करते थे, जिस अर्णब ने शाहीनबाग की महिलाओं और दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को देशविरोधी कहा, आज खुद उनकी देशभक्ति का पर्दाफाश हो गया है। खबर लिखे जाने तक एंटी नेशनल अर्णब ट्रेंड कर रहा है और करीब डेढ़ लाख ट्वीट हो चुके हैं। आज अर्णब से ही देश पूछ रहा है कि बालाकोट में हमले से पहले उन्हें कैसे जानकारी थी कि कुछ बड़ा होनेवाला है।

मालूम हो कि घटना के तीन दिन पहले ही उन्होंने बीएआरसी ( ब्राडकास्ट आडिएंस रिसर्च काउंसिल) के सीईओ पार्थ दासगुप्ता से कहा था कि कुछ बहुत बड़ा होनेवाला है। इसका अर्थ है कि उन्हें बालाकोट पर हमले की जानकीर थी। सेना की योजना अत्यंत गुप्त होती है, जिसकी जानकारी कुछ खास लोगों को ही होती है। यह जानकारी अर्णब को कैसे थी। यह सवाल राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है।

तेजस्वी ने जिन सवालों को उठाया है, खबर लिखे जाने तक किसी भाजपा के नेता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हां, सोशल मीडिया पर जरूर कुछ लोग अर्णब के पक्ष में खड़े दिख रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके वाट्सएप चैट का लीक होना निजता का उल्लंघन है। लेकिन जो सवाल उठ रहे हैं, उन पर वे चुप्पी साधे हुए हैं।

पिछली बार जब अर्णब की गिरफ्तारी हुई थी, तब भाजपा के सभी प्रमुख नेता उनके बचाव में आए थे। देखना है कि इस बार भाजपा उनका बचाव करती है या उनसे पल्ला झाड़ लेती है।

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